Kaushlendra Pandey/ शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा आज सचिवालय स्थित डॉ. मदन मोहन झा सभागार में बच्चों की रचनात्मकता को समर्पित एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। माननीय शिक्षा मंत्री श्री सुनील कुमार की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में बच्चों की नौ पुस्तकों का लोकार्पण एवं बाल-संवाद आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11:30 बजे माननीय मंत्री शिक्षा विभाग को श्री मयंक वरवड़े, राज्य परियोजना निदेशक द्वारा पुष्पगुच्छ प्रदान कर स्वागत किया गया। इसके बाद किलकारी की निदेशक श्रीमती ज्योति परिहार ने श्री मयंक वरवड़े, राज्य परियोजना निदेशक, दिनेश कुमार, सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार सरकार एवं श्रीमती साहिला , प्राथमिक शिक्षा निदेशक का स्वागत पुष्प गुच्छ देकर किया।
किलकारी के बच्चों की उपलब्धि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच बना चुकी है। बच्चे खेल से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कर रहे हैं। भारत के नामचीन कला विश्वविद्यालयों में बच्चों को उच्च शिक्षा का अवसर प्राप्त हुआ है। वर्ष 2024-25 में पचास से अधिक बच्चों की उपलब्धियां बेहद मायने रखती हैं।
सभी उपलब्धि प्राप्त बच्चों की विवरणी संलग्न है।
लोकार्पण कार्यक्रम
किलकारी के बच्चों की रचनात्मक उड़ान – नौ पुस्तकों का लोकार्पण माननीय शिक्षा मंत्री द्वारा
किलकारी बिहार बाल भवन, पटना के बच्चों द्वारा रचित नौ पुस्तकों का लोकार्पण आज माननीय शिक्षा मंत्री श्री सुनील कुमार के कर-कमलों से सचिवालय स्थित मदन मोहन झा सभागार में सम्पन्न हुआ। यह अवसर बच्चों की सृजनात्मकता, शोध-दृष्टि और साहित्यिक प्रतिभा का जीवंत प्रमाण बना।
इन पुस्तकों में भारतरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिनकर के बचपन से जुड़े संस्मरण, जनकवि बाबा नागार्जुन का धुमक्कड़ी स्वभाव, प्रकृति और पर्यावरण के साथ बच्चों का आत्मीय रिश्ता, तथा बाल लेखकों के अपने जीवन-संघर्ष और संवेदनशील अनुभव संजोए गए हैं।
लोकार्पित पुस्तकों में शामिल हैं:
1. रोज मिलने आऊँगा – लेखिका: नेहा सोनी
- धुमक्कड़ बाबा – लेखक: चिंटू कुमार
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जा..! जहाज छूटा – लेखिका: श्रेया कुमारी
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नुनु से दिनकर – लेखिका: नीकू कुमारी
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माफ़ करेंगे न! – लेखिका: ज्योति परिहार
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ठक्कन मिसिर – लेखक: अतुल राय
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नटखट राजेन – लेखिका: निमिषा कुणाल
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बच्चे का मन (लघुकथा-संग्रह) – लेखक: अनुराग कुमार
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पंछी के खोते की खुद्दी – (कविता संग्रह) युवा कवि: मुनटुन राज
माननीय शिक्षा मंत्री श्री सुनील कुमार ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “यह रचनाएँ केवल साहित्यिक कृतियाँ नहीं हैं, बल्कि बच्चों की संवेदनशील दृष्टि, मेहनत और सीखने की जिजीविषा की मिसाल हैं। किलकारी ने बच्चों को जो अवसर दिया है, वह आने वाले समय में उन्हें समाज और राष्ट्र के लिए रचनात्मक योगदान करने की दिशा में प्रेरित करेगा।”
उन्होंने कहा कि हमें महान विभूतियों प्रथम राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम, साहित्यकार रेणु जी एवं दिनकर जी के जीवन से सादगी, सहजता जैसे जीवन मूल्यों के गुणों को सीखना चाहिए। बिहार के बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहे हैं।
कार्यक्रम में बच्चों, प्रशिक्षकों, मीडिया कर्मियों एवं विभाग के अधिकारियों की अच्छी संख्या में उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा माननीय शिक्षा मंत्री का बच्चों के साथ संवाद एवं अभिभाषण। उन्होंने बच्चों को उनके साहित्यिक और रचनात्मक कार्यों के लिए प्रोत्साहित किया और शिक्षा विभाग की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम के अंत में BEPC राज्य परियोजना निदेशक श्री मयंक वरवड़े द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
यह आयोजन बच्चों की रचनात्मकता को मंच देने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने का महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ।

























