नई दिल्ली | कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी/ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश करार देते हुए केंद्र और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के नाम पर वास्तविक मतदाताओं को डराया, अपमानित और आतंकित किया जा रहा है, जबकि भेदभावपूर्ण तरीके से पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया गया है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि जो प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए होनी चाहिए थी, वह भय, अफरा-तफरी और सामूहिक दहशत का कारण बन गई है। इस कथित कार्रवाई की मानवीय कीमत असहनीय है। उनके अनुसार अब तक 150 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें आम नागरिक और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि जीवित मतदाताओं को “मृत” घोषित किया जा रहा है। महिलाएं, गर्भवती माताएं, बुजुर्ग, बीमार, प्रवासी मजदूर और दिहाड़ी कामगारों को अपनी नागरिकता और मताधिकार साबित करने के लिए अपमानजनक परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है।
दिल्ली स्थित बंगा भवन में मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संविधान, लोकतंत्र और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना पर सीधा हमला है। उन्होंने बताया कि आज उन्होंने उन पीड़ित परिवारों और नागरिकों से मुलाकात की, जिन्होंने इस प्रक्रिया में अपने प्रियजनों को खोया है या जिनका लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिया गया है। पीड़ितों की कहानियां बेहद दर्दनाक हैं।
ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त को अब तक छह पत्र लिखे हैं और स्वयं दिल्ली आकर संवाद और जवाबदेही की मांग की, लेकिन उन्हें केवल चुप्पी, टालमटोल और सार्थक बातचीत से इनकार ही मिला। उन्होंने इसे संवैधानिक जिम्मेदारी से पलायन बताया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर बीजेपी को लड़ना है तो वह राजनीतिक और लोकतांत्रिक तरीके से लड़े। लेकिन वह ऐसा नहीं कर पा रही है, इसलिए लोकतंत्र को ही कमजोर करने की कोशिश कर रही है।”
उन्होंने दावा किया कि ये “बांग्ला-विरोधी साजिशें” असफल होंगी और जनता की इच्छा अंततः विजयी होगी।
ममता बनर्जी ने दो टूक कहा कि भारत की लोकतांत्रिक आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

























