बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर जो आरोप लगे हैं, उस संबंध में वह पब्लिक के बीच आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करें, क्योंकि उन पर जो हत्या के मामले में बरी होने कि बातें सामने आई है, उसमें फर्जी तरीके से दस्तावेज लगाकर बरी होने का मामला सामने आया है,यह बहुत ही गंभीर मामला है। और इस तरह के मामले पर मुख्यमंत्री और भाजपा का शीर्षस्थ नेतृत्व चुप क्यों है। यह बात समझ से परे है।
इन्होंने आगे कहा कि जहां तक प्रशांत किशोर पांडेय का सवाल है उन्हें यह बताना चाहिए कि जब वह भ्रष्टाचार के मामले को उजागर कर रहे हैं, तो उसमें शर्तों के साथ क्यों बात कर रहे हैं। जहां अशोक चौधरी के संबंध में कह रहे हैं कि हमारी यह शर्तें नहीं अगर मानी तो हम और घोटाले को उजागर करेंगे, क्या इसी तरह की राजनीति करके आप भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ सकते हैं।
वहीं उन्होंने आज मंगल पांडे और दिलीप जायसवाल वाले मामले पर चुप्पी साध ली । क्या अंदर खाने भाजपा से कोई समझौता हो गया है, क्योंकि प्रशांत किशोर पांडेय जी जब आप मामले को उजागर कर रहे हैं तो उसमें शर्तें कहां से आई और शर्तों पर जब बात आ गई है,तो इसका मतलब है कि अन्दर खाने समझौता हो रहा है और समझौते का मतलब है कि कहीं ना कहीं दूसरे तरह का खेल हो रहा है। इस तरह की राजनीति करने वाले जनता के बीच में बेनकाब हो जाएंगे क्योंकि शर्तों के साथ भ्रष्टाचार और अन्य तरह के मामले को उजागर करने की बात से ही स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा राजनीति किस तरह से की जा रही है।



























