प्रियंका भारद्वाज/टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के इतिहास विभाग द्वारा ‘जनजातीय गौरव वर्ष 2025’ के अंतर्गत एकदिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के रूप में घोषित ‘जनजातीय गौरव दिवस’ की भावना को समर्पित था। व्याख्यान का विषय ‘जनजातीय समुदायों का सामाजिक-सांस्कृतिक एकीकरण: अवसर और चुनौतियां’ था, जिसमें जनजातीय समुदायों की ऐतिहासिक भूमिका, नीतिगत दृष्टिकोण, विस्थापन की चुनौतियां और समावेशी विकास के अवसरों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि जनजातीय समुदायों को सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है। जनजातीय आबादी का अनुपात कम होने के बावजूद महत्वपूर्ण है। बिरसा मुंडा को नमन करते हुए उन्होंने औपनिवेशिक काल में भारतीय वन अधिनियम 1865 और विस्थापन के मनोवैज्ञानिक प्रभावों का उल्लेख किया। उन्होंने संथाल, गोंड, भील और PVTG समुदायों पर शोध, नेहरू के पंचशील सिद्धांतों, और भारतीय ज्ञान प्रणाली के माध्यम से जनजातीय चिकित्सा व प्रकृति-आधारित कौशलों के विकास पर जोर दिया। प्रो. शांडिल्य ने भारत की जनसंख्या को ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ बताते हुए समावेशी विकास और नीति आयोग की ‘सब-प्लान’ अवधारणा की सराहना की।
कार्यक्रम की शुरुआत में आयोजन सचिव डॉ. प्रशांत कुमार ने जनजातीय समुदायों की समृद्ध विरासत और योगदान पर चर्चा की। उन्होंने बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को जनजातीय नायकों को स्मरण करने का अवसर बताया और उनके नारे ‘अपना देश, अपना राज’ का उल्लेख किया। उन्होंने जनजातीय जीवन को प्रकृति और मानव के सामंजस्य पर आधारित बताते हुए विभिन्न संस्कृतियों से सीखने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) सुधीर कुमार सिंह, प्राचार्य, वैशाली महिला महाविद्यालय, ने जनजातीय समुदायों को चार नीतिगत दृष्टिकोणों—आइसोलेशन, असिमिलेशन, इंटीग्रेशन और आइडेंटिफिकेशन—के माध्यम से समझाया। उन्होंने ब्रिटिश शासन की निष्कर्षण-आधारित अर्थव्यवस्था, जनसंख्या गणना में अतिसामान्यीकरण और ‘इकोलॉजिकल इम्पीरियलिज्म’ की आलोचना की। असिमिलेशन नीति को सांस्कृतिक शुद्धता के लिए हानिकारक बताते हुए उन्होंने नेहरूवादी इंटीग्रेशन मॉडल की सराहना की, जो विकास, संरक्षण और परोपकारी दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने औद्योगीकरण और वैश्वीकरण से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए ‘ऑल इन्क्लूसिव पॉलिसी’ की वकालत की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष कुमार चौधरी ने कुशलतापूर्वक किया। धन्यवाद ज्ञापन में डॉ. मुकुंद कुमार ने सभी वक्ताओं और उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रो. विजय कुमार सिन्हा, प्रो. रूपम, डॉ. नुपुर, डॉ. विनय भूषण कुमार, डॉ. सुशोभन पलाधि, डॉ. नूतन कुमारी, डॉ. हंस कुमार सिंह, डॉ. देबारती घोष, डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ. सानंदा सिन्हा, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. शशि शेखर सिंह, डॉ. ऊषा किरण, डॉ. प्रीति कुमारी और मनोज कुमार सिंह उपस्थित रहे। यह आयोजन जनजातीय गौरव वर्ष की थीम को मजबूत करने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण रहा।


























