पटना ब्यूरो , 2 अप्रैल 2026: टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित एक माह का कार्यशाला “ऑयस्टर मशरूम कल्टीवेशन एवं स्पॉन प्रोडक्शन” का समापन (वैलेडिक्टरी फंक्शन) आज विभाग परिसर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम IQAC, टी.पी.एस. कॉलेज के सहयोग से आयोजित किया गया।
प्रधानाचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने अपने विशेष संबोधन में कहा:
“मशरूम का इतिहास अत्यंत प्राचीन और रोचक रहा है। प्राचीन काल में इसे ‘देवताओं का आहार’ माना जाता था और इसकी दुर्लभता के कारण इसे विशेष महत्व प्राप्त था। आज वही मशरूम विज्ञान और तकनीक के माध्यम से आम लोगों के लिए आय और पोषण का सशक्त साधन बन चुका है। विशेष रूप से ऑयस्टर मशरूम कम समय (21 दिन) में तैयार होकर युवाओं को त्वरित आय का अवसर प्रदान करता है।
हिमाचल प्रदेश का सोलन आज ‘मशरूम सिटी’ के रूप में पूरे देश में प्रसिद्ध है, जहाँ वैज्ञानिक पद्धति से बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है। उसी प्रकार बिहार में नालंदा जिला भी मशरूम उत्पादन के एक उभरते केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। यह संकेत है कि हमारे राज्य में भी इस क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं।
यदि विद्यार्थी इस प्रशिक्षण को आत्मसात कर व्यावहारिक रूप में अपनाएं, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त कर सकते हैं। टी.पी.एस. कॉलेज ऐसे कौशल-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. मनोरमा कुमारी (विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय) उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों को इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. रिमझिम शील (पूर्व डीन, विज्ञान संकाय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय) ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उद्यमशीलता का विकास करते हैं।
विशेष अतिथि डॉ. राम दास प्रसाद (सेवानिवृत्त सह-प्राध्यापक, वनस्पति विज्ञान, टी.पी.एस. कॉलेज) ने कार्यशाला के दौरान प्राप्त व्यावहारिक ज्ञान को जीवन में लागू करने पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं आयोजन प्रमुख डॉ. विनय भूषण कुमार ने की। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को मशरूम उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया—स्पॉन निर्माण, उत्पादन तकनीक एवं विपणन—का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन समन्वयक डॉ. रवि प्रभाकर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर 50 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।
इस अवसर पर प्रो. विजय कुमार सिन्हा, प्रो. रूपम, प्रो. अंजलि, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. सोनू प्रताप, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. सुशोभन पलाधि, डॉ. सानंदा सिन्हा, डॉ. ज्योत्स्ना कुमारी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में स्वरोजगार, कौशल विकास एवं उद्यमिता के प्रति नई चेतना का संचार किया।
यह जानकारी मीडिया संयोजक डॉ. मुकुंद कुमार ने दी।




























