भुवनेश्वर | कंट्री इनसाइड न्यूज़ एजेंसी/जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा ओडिशा सरकार के सहयोग से भुवनेश्वर में आयोजित जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) को सुदृढ़ बनाने संबंधी दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन ‘भुवनेश्वर घोषणापत्र’ के साथ हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य देशभर के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को अधिक प्रभावी, आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाकर उन्हें जनजातीय विकास एवं नीति निर्माण का मजबूत केंद्र बनाना था।
कार्यशाला को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत-2047” के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया। इसमें देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए व्यापक मंथन किया।
दो दिनों तक चले विचार-विमर्श में जनजातीय संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण, शोध एवं दस्तावेजीकरण, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), डेटा आधारित नीति निर्माण तथा संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को केवल शोध संस्थान नहीं, बल्कि जनजातीय ज्ञान, संस्कृति, नवाचार और नीति निर्माण के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
कार्यशाला के दौरान जनजातीय ज्ञान और संस्कृति के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने, अनुसंधान को नई तकनीकों से जोड़ने, राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा युवाओं और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। इसके साथ ही डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म TribeX सहित कई नवाचारों और साझेदारी पहलों पर भी चर्चा हुई, जिससे जनजातीय अध्ययन और अनुसंधान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
समापन अवसर पर जारी भुवनेश्वर घोषणापत्र में जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सशक्त बनाने, अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाने, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, तकनीकी नवाचार को अपनाने तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने का साझा संकल्प व्यक्त किया गया।
जनजातीय कार्य मंत्रालय का मानना है कि इस कार्यशाला और भुवनेश्वर घोषणापत्र से देशभर के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा जनजातीय समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी। यह पहल विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

























