कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली।भारत में दुनिया की सबसे जीवंत और विविध आदिवासी आबादी निवास करती है। देश में 10.45 करोड़ से अधिक आदिवासी नागरिक हैं, जो कुल जनसंख्या का लगभग 8.6% हिस्सा हैं। ये समुदाय न केवल भारत की सभ्यतागत धरोहर के अभिन्न हिस्से हैं, बल्कि इन्होंने सदियों से अपनी समृद्ध परंपराओं, भाषाओं और ज्ञान प्रणालियों को भी संरक्षित रखा है।
पिछले एक दशक में भारत सरकार ने अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और विकास को प्राथमिकता दी है। इसी क्रम में जनजातीय कार्य मंत्रालय के बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मंत्रालय का वार्षिक बजट तीन गुना तक बढ़ाया गया है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और आधारभूत ढांचे के विकास जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनकी विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखा जाए। इस दिशा में कई नए कार्यक्रम और योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की स्थापना, वन अधिकारों को सुनिश्चित करना, और पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहन देना शामिल है।
इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि देश के आदिवासी समुदायों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकेगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के अधिक अवसर मिलेंगे।
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