रामेश्वर महाविद्यालय में मंगलवार को ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में शैक्षणिक नेतृत्व की भूमिका’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन हुआ। शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में सम्मान-समारोह के इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद, पटना के उपाध्यक्ष प्रो. कामेश्वर झा ने कहा कि शिक्षक छात्रों को संतान की तरह समझे। शिक्षकों की भूमिका उनके वर्ग में मन से पढ़ाने से है।

उन्होंने छात्रों और अभिभावकों से कहा कि स्वच्छता, सुचिता, विनम्रता, अनुशासन का स्थान जीवन में दें, तो आपके बच्चे जरूर सफल होंगे। शिक्षकों आदर्श बनना चाहिए। फंडामेंटल ड्यूटी को जरूर पालन जरूर करें। उन्होंने कहा राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों और विश्विद्यालयों को विकास मद में काफी राशि दी गई है। इस शहर के कई कॉलेजों को भी राशि प्रदान की गई है। रामेश्वर महाविद्यालय को योजनाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने कॉलेज के प्राचार्य को कुलसचिव के माध्यम से तुरंत प्रस्ताव परिषद को सौंपने को कहा। उन्होंने भरोसा दिया कि इस कॉलेज को आवश्यक रूप से एक से दो प्रस्ताव को बहुत जल्द स्वीकृत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार निर्देश पर कॉलेजों में विकास के कार्य लगातार हो रहे हैं। उन्होंने कहा अब स्नातक में सीबीसीएस आ गई है। इसमें पूरे बिहार के विवि व कॉलेज से शिकायत मिली है। इसे दूर करना होगा। बेहतर वातावरण बनाइये, क्योंकि एक के कारण पूरे की बदनामी होती है। शिक्षक प्राण हैं। कर्मचारी मेरुदंड हैं।
उन्होंने सलाह दिया कि सेमिनार आदि कक्षाओं के समय न हो। साल में 220 दिन पढ़ाई का समय है। इसमें कमी होगी तो शिक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
विशिष्ट अतिथि पूर्व कुलपति प्रो.कुलानंद झा ने छात्रों से कहा आपमे नम्रता होगी तो विध्वता होगी। जन्म से कोई विद्वान नहीं होता। शिक्षकों का कर्तव्य है कि सभी छात्रों को एक समान देखें। समानतामूलक समाज में शिक्षकों की बड़ी भूमिका होती है। छात्रों में गुरूओं के साथ श्रद्धाभाव होनी चाहिए। आप शिक्षक से सवाल कीजिये। जिज्ञासु होना चाहिए और गुरु के निकट होंगे तो विद्या की प्राप्ति होगी साथ वह विद्धान बनता है।
अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. श्यामल किशोर ने कहा जीवन का उद्देश्य सीखना है। सीखते हैं दूसरों के अनुभवों से। जब आप काम करते हैं तो समाज की नजर रहती है कि आप किस प्रकार काम कर रहे हैं। आप अच्छे काम करेंगे तो समाज और सरकार आपको याद करेगी। इसी का इनाम प्रो.कामेश्वर झा जी को मिला। उन्होंने कहा शिक्षण संस्थान की पहचान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही हो सकती है। महाविद्यालय में छात्रों के नामांकन की तुलना में बैठने की क्षमता कम है। सात प्रखंड के छात्र यहां पढ़ते हैं। ऐसे में कॉलेज का परिसर छोटा है। उन्होंने मांग किया कि कॉलेज के आधारभूत संरचना के लिए सरकार से फंड मिले। आने वाले दिनों में यह कॉलेज अन्य से किसी तुलना में कम नहीं होगा। सोते-जागते यही सोचता हूँ कि कैसे आगे बढ़े। उन्होंने शिक्षक से उनकी भूमिका का सही से निर्वहण करने की बात कही। पूर्व कुलपति प्रो.तौकीर आलम ने कहा कि इस कॉलेज को स्वतंत्रता सेनानियों ने कायम किया। उन्होंने एनएसएस और एनसीसी कार्यो की जानकारी दी। देश में किसी संकट की घड़ी में ये दोनों खड़े रहते हैं। छात्रों से कहा कामयाबी के लिए नॉलेज बहुत जरूरी है। कार्यक्रम में स्वागत प्रो.ब्रह्मचारी व्यास नंदन शास्त्री ने किया। मंच संचालन प्रो.रजनी रंजन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ.शारदानंद सहनी ने किया। मौके पर भारती झा, युवा समाजसेवी मुकेश कुमार सहित सभी शिक्षक व कर्मचारियों के साथ इस दौरान कॉलेज के सभी शिक्षकों को प्राचार्य ने सम्मानित किया।




























