Kaushlendra Pandey नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज ‘राष्ट्रीय आदि कर्मयोगी अभियान’ (National Conclave on Adi Karmayogi Abhiyan) के राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की जीवन परंपराएँ हमें सिखाती हैं कि विकास तभी सार्थक होता है जब वह प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर आगे बढ़े।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन वास्तविक प्रगति तभी मानी जाएगी जब समाज के सभी वर्गों का समावेशी विकास सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा:
“हमारे विकास की यात्रा ऐसी होनी चाहिए जिसमें हर समाज, हर वर्ग और हर व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित हो। समाज के किसी भी वर्ग को पीछे छोड़कर विकास का दावा नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने विशेष तौर पर जनजातीय समुदाय की संस्कृति, प्रकृति संरक्षण की परंपरा, सामाजिक सहयोग की भावना और श्रम के सम्मान को भारतीय जीवन मूल्यों का अभिन्न हिस्सा बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज केवल भारत की विरासत ही नहीं बल्कि हमारी भविष्य की विकास यात्रा के लिए प्रेरणा स्रोत भी है। उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, सतत विकास और स्वाभिमान के साथ जीवन को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
📌 राष्ट्रपति के प्रमुख वक्तव्य
“जनजातीय परंपराओं में प्रकृति मां की तरह पूजी जाती है।”
“विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब विकास समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित हो।”
“‘आदि कर्मयोगी अभियान’ आज के युवाओं और जनजातीय समाज को आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करेगा।”
कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न राज्यों के जनजातीय प्रतिनिधि शामिल हुए।

























