प्रियंका भारद्वाज /जेएनयू के 9वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का आह्वान/डिग्री से आगे बढ़कर चरित्र, बौद्धिक ईमानदारी और राष्ट्र निर्माण पर जोर.
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने युवाओं से बौद्धिक ईमानदारी बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, बौद्धिक मजबूती और आत्मनिर्भरता पैदा करना होना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि आज के युवा देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं और उन्हें अपनी शिक्षा का उपयोग समाज व राष्ट्र के व्यापक हित में करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विश्वविद्यालयों को ऐसे नागरिक तैयार करने चाहिए जो तर्कशील, नैतिक और जिम्मेदार हों।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जेएनयू की समृद्ध शैक्षणिक परंपरा और बौद्धिक विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने स्नातकों से आह्वान किया कि वे #JNU की वैचारिक शक्ति और आलोचनात्मक सोच को साथ लेकर देश के विकास और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभाएं।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जेएनयू ने हमेशा देश को ऐसे छात्र दिए हैं, जिन्होंने नीतिगत विमर्श, शोध और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, और आने वाली पीढ़ी से भी यही अपेक्षा है।
दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। यह आयोजन शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति दायित्व और सामाजिक चेतना का संदेश लेकर सामने आया।
रिपोर्ट: कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी
सौजन्य: शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education)





























