पटना 6 अप्रैल 2026 ; राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने बिहार की एनडीए सरकार पर नये डिग्री कॉलेज खोलने के नाम पर आंख में धूल झोंकने और शिक्षा व्यवस्था को मजाक बना देने का गंभीर आरोप लगाया है।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि एनडीए सरकार के पिछले बीस वर्षों में बिहार की शिक्षा व्यवस्था को चौपट और बर्बाद कर देने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की सारी घोषणाएं अबतक केवल कागजी और दिखावटी साबित हुआ है। सरजमीं पर स्थिति बद से बद्तर होती जा रही है। अभी सरकार द्वारा घोषणा किया गया है कि राज्य में 209 नये डिग्री कॉलेज खोलने और 9196 शिक्षक और गैर शैक्षणिक कर्मियों को बहाल करने की घोषणा की गई है। यह केवल आंख में धूल झोंकने के समान है।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि अभी राज्य के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों में आधे से ज्यादा पद रिक्त हैं। सरकारी आंकड़े के अनुसार हीं राज्य में अभी 4000 से ज्यादा शिक्षकों का पद रिक्त है जबकि वास्तविक स्थिति में रिक्तियों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। अधिकांश कॉलेजों में गेस्ट फैकल्टी द्वारा काम चलाया जा रहा है। अभी भी कई कॉलेजों में तो किसी-किसी विभाग में एक भी शिक्षक नहीं है। यही स्थिति गैर शैक्षणिक कर्मियों की है।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि इसी प्रकार सरकार द्वारा कागजी तौर पर सभी ग्राम पंचायतों के एक-एक माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक विद्यालय और प्लस टू विधालय में उत्क्रमित कर दिया गया। इसमें अधिकांश विद्यालयों में न तो सही ढंग से आधारभूत संरचना की व्यवस्था की गई है, न पर्याप्त शिक्षक हैं, न पर्याप्त उपस्कर है और न प्रायोगिक कक्षा की व्यवस्था है। और सबसे मजेदार बात तो यह है कि सम्बद्ध ग्रामपंचायत के छात्रों को अपने हीं ग्रामपंचायत के नव उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय और प्लस टू विधालय में नामांकन लेने को मजबूर कर दिया गया है। पुराने उच्च माध्यमिक विद्यालयों और प्लस टू में भी बड़ी संख्या ऐसे विद्यालयों की है जहां कई विषयों में एक भी शिक्षक नहीं है।
राजद प्रवक्ता ने बताया कि प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। हर महीने बड़ी संख्या में शिक्षक अवकाश ग्रहण करते जा रहे हैं और सरकार के संचिका में आज भी 2013 के पहले वाली आंकड़े की हीं गणना हो रही है। वास्तविकता तो यही है कि सरकार के पास शिक्षकों की आवश्यकता, उपलब्धता और वर्तमान में रिक्तियों का सही आंकड़ा हीं उपलब्ध नहीं है। इसीलिए रिक्तियों के बारे में मुख्यमंत्री, मंत्री और विभागीय अधिकारियों के बयानों में काफी विरोधाभास दिखाई पड़ता है। बिहार में जब महागठबंधन की सरकार थी तो मात्र 17 महीने में हीं टीआरई 1 और टीआरई 2 के माध्यम से बड़े पैमाने पर शिक्षकों की बहाली हुई, टीआरई 3 की प्रक्रिया भी उसी सरकार के समय शुरू हो गई थी । एनडीए सरकार द्वारा पिछले 18 महीने से टीआरई 4 की घोषणा की जा रही है पर अभी तक नोटिफिकेशन भी जारी नहीं हो पाया है। यह सरकार केवल डपोरसंखि घोषणाएं करती है जो केवल कागजी और दिखावटी साबित होती है।


























