नई दिल्ली। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और नीतिगत चुनौतियों पर केंद्रित एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन ‘कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया’ में भारतीय रेलवे माल गोदाम श्रमिक संघ (बीआरएमजीएसयू) द्वारा किया गया। सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और श्रम मंत्रालय के प्रतिनिधियों सहित श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के लेबर वेलफेयर असिस्टेंट श्री संदीप चौरसिया, एटीएसईसी के श्री संजय कुमार मिश्रा और विश्वजीत घोष जैसे प्रमुख वक्ताओं ने भाग लिया। इन विशेषज्ञों ने श्रमिकों की स्थिति, नीतिगत सुधारों और जमीनी वास्तविकताओं पर व्यापक चर्चा की।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए आईएलओ के मुख्य तकनीकी अधिकारी जियोवानी सोलेदाद ने कहा कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन वे अब भी औपचारिक मान्यता और संस्थागत सुरक्षा से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधित्व की कमी और सामूहिक सौदेबाजी के अभाव के कारण ये श्रमिक शोषण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। सोलेदाद ने रेखांकित किया, “अधिकांश श्रमिकों के पास न तो औपचारिक अनुबंध हैं और न ही सामाजिक सुरक्षा (जैसे स्वास्थ्य बीमा, पेंशन या दुर्घटना मुआवजा), जिससे वे किसी भी आर्थिक संकट में अत्यधिक असुरक्षित हो जाते हैं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपर्याप्त आय के कारण परिवारों को बाल श्रम जैसी विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिससे गरीबी का दुष्चक्र बना रहता है। आईएलओ द्वारा झारखंड और राजस्थान में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संगठित प्रयासों से ही श्रमिकों को सरकारी योजनाओं और बेहतर कार्य परिस्थितियों तक पहुँच मिल सकती है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों को मानवाधिकार के रूप में देखना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए श्रम कानूनों के प्रति श्रमिकों में जागरूकता और उत्साह बढ़ा है। लगभग 43 करोड़ श्रमिकों को इन योजनाओं से लाभ पहुँचाने का लक्ष्य है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इन कानूनों के प्रति जागरूकता फैलाना और श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीआरएमजीएसयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष परिमल कांती मंडल ने श्रमिकों की प्रमुख मांगों—निश्चित वेतन, नियुक्ति पत्र और श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन—को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को एकजुट कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना है, ताकि उन्हें सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां और स्थायी आजीविका मिल सके।
सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने, उनके प्रतिनिधित्व को मजबूत करने और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बहु-स्तरीय सहयोग अनिवार्य है। वक्ताओं ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के संवाद भविष्य में ठोस नीतिगत बदलाव और श्रमिकों के जीवन में वास्तविक सुधार का मार्ग प्रशस्त करेंगे।



























