सौरभ निगम/लखनऊ, 1 मई:मजदूर दिवस के अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्र और राज्य सरकारों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह सरकार न सिर्फ श्रमिक विरोधी है, बल्कि मजदूरों को उनका वाजिब हक तक नहीं देती।
अखिलेश यादव ने लखनऊ में पार्टी मुख्यालय पर आयोजित ‘श्रमिक संवाद’ कार्यक्रम में कहा, “भाजपा की नीतियाँ केवल बड़े उद्योगपतियों के हित में हैं। मजदूरों और कर्मचारियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सरकारी संस्थानों में स्थायी नियुक्तियों की जगह आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आरक्षण खत्म हो रहा है और श्रमिकों की सुरक्षा भी खतरे में है।”
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में महंगाई, बेरोजगारी और श्रमिक शोषण चरम पर है। “आज का नौकरीपेशा वर्ग मानसिक और आर्थिक रूप से बंधुआ मजदूर बनता जा रहा है। न न्यूनतम वेतन सुनिश्चित है, न काम के घंटे तय हैं, और न ही कोई सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध है,” अखिलेश ने कहा।
कोरोना काल की चर्चा करते हुए उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने उस समय मजदूरों को उनके हाल पर छोड़ दिया था। “जब लाखों मजदूर पैदल अपने घर लौट रहे थे, उस वक्त सरकार ने कोई व्यवस्था नहीं की। समाजवादी पार्टी ने ही उनके भोजन, रहने और लौटने की व्यवस्था की थी,” उन्होंने दावा किया।
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी सत्ता में आने पर मजदूरों और किसानों के अधिकारों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। उन्होंने श्रमिकों से आह्वान किया कि वे भाजपा के झूठे वादों में न आएं और अपने हक की लड़ाई के लिए संगठित हों।
अखिलेश यादव की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देशभर में श्रमिक संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं।
रिपोर्ट: कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी
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