नई दिल्ली: जब देश की बेटियाँ “सिंदूर” लगाकर अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी सिंदूर की भावना को राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रतीक बनाकर आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ दी।
मोदी ने आतंकवादियों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि यह देश अपनी बेटियों के “सिंदूर” की लाज रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। पुलवामा हमले के बाद जिस आक्रोश ने देश को झकझोरा, उसी भावना को आत्मसात कर प्रधानमंत्री ने कहा था – “ये सिंदूर सिर्फ एक रंग नहीं, ये हमारी अस्मिता है, हमारी आस्था है, और इसकी रक्षा के लिए हर सीमारेखा पार की जा सकती है।”
बालाकोट एयर स्ट्राइक के ज़रिए मोदी सरकार ने आतंकवाद को सीधी चुनौती दी और यह दिखा दिया कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा। मोदी के इस साहसिक निर्णय से देश की हर बेटी ने महसूस किया कि उसका सिंदूर अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा का हिस्सा बन चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी के इस दृष्टिकोण ने राष्ट्रीय राजनीति में ‘बेटियों के सम्मान’ को केवल नारे तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे एक निर्णायक नीति का रूप दे दिया। आज जब देश की महिलाएँ रक्षाबलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं, तो उसमें कहीं न कहीं मोदी के उस संदेश की छाया दिखती है – “जिस सिंदूर के लिए तुमने उठाई थी बंदूक, अब वही सिंदूर तुम्हारे अंत का कारण बनेगा।”
देश आज जानता है – अगर बेटियाँ माँ भारती की लाज हैं, तो मोदी उनकी ढाल।






















