रिपोर्ट: कौशलेन्द्र पाण्डेय/पटना, 28 मई 2025 – बिहार सहित देशभर के विद्यालयों में 31 मई 2025, शनिवार को एक महत्वपूर्ण अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य छात्रों की शैक्षणिक प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ ग्रीष्मावकाश को रचनात्मक रूप से उपयोगी बनाना है। संगोष्ठी का विषय ‘पढ़ेंगे, बढ़ेंगे और सीखेंगे हम’ रखा गया है।
शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में जारी वार्षिक कैलेंडर (पत्रांक 1188, दिनांक 2 मई 2025) के अनुसार यह संगोष्ठी हर माह के अंतिम शनिवार को आयोजित की जाती है। मई माह की संगोष्ठी गर्मी की छुट्टी (1 जून से) के ठीक पहले हो रही है, जिससे यह और भी महत्वपूर्ण बन जाती है।
संगोष्ठी के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
🔹 पाठ्यसामग्री की जानकारी और रख-रखाव: शिक्षक अभिभावकों को यह जानकारी देंगे कि छात्रों को पाठ्यपुस्तक, अभ्यास पुस्तिका, डायरी और टीएलएम किट प्राप्त हो चुकी है या नहीं। पुस्तकों के कवर लगाने हेतु समाचार पत्र, पुराने कैलेंडर आदि का उपयोग करने का सुझाव दिया जाएगा।
🔹 पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति: 1 अप्रैल से 31 मई तक पढ़ाए गए पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति छुट्टियों में घर पर कराई जाए, इसके लिए अभिभावकों को प्रेरित किया जाएगा।
🔹 हर घर एक पाठशाला: छात्रों के लिए घर में पढ़ाई के लिए एक शांत और सुव्यवस्थित कोना विकसित करने के लिए सुझाव दिए जाएंगे।
🔹 गृहकार्य की जानकारी: एससीईआरटी द्वारा निर्धारित गृहकार्य की जानकारी दी जाएगी, जिसे शिक्षक ई-शिक्षाकोष से डाउनलोड कर अभिभावकों को देंगे। गृहकार्य पूरा कराने में कठिनाई होने पर शिक्षक से सहायता ली जा सकती है।
🔹 पुस्तक वितरण की स्थिति: यदि किसी छात्र को अब तक पुस्तकें नहीं मिली हैं, तो संगोष्ठी के दिन ही उपलब्ध कराने का निर्देश है।
🔹 सामाजिक व नैतिक शिक्षा: पुस्तकों के मुखपृष्ठ व अंतिम पृष्ठ पर दिए गए यातायात नियम, स्वच्छता और नागरिक कर्तव्यों जैसे निर्देशों पर विशेष चर्चा की जाएगी।
🔹 फोटोग्राफी व दस्तावेजीकरण: सभी प्रधानाध्यापक संगोष्ठी की फोटोज़ अच्छे रिजॉल्यूशन में लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से विभागीय लिंक पर भेजेंगे। चयनित तस्वीरें विभागीय वेबसाइट, फेसबुक पेज और पत्रिका में प्रकाशित की जाएंगी।
🔹 अभिभावकों से सुझाव: विद्यालयी वातावरण को और बेहतर बनाने के लिए अभिभावकों से सुझाव लिए जाएंगे और उनका लेखा-जोखा रखा जाएगा।
शिक्षा विभाग ने सभी प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों से संगोष्ठी को सार्थक, संवादात्मक और अभिलेखीय रूप से प्रभावी बनाने की अपील की है। साथ ही यह भी अपेक्षा की है कि अभिभावक इस संवाद में सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने बच्चों की शिक्षा को नई दिशा दे.





























