रिपोर्ट – कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी | पटना, बिहार/प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आज प्रस्तावित बिहार यात्रा को लेकर राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। इसी क्रम में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक तीखा ट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी से 12 ज़ोरदार सवाल पूछे हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री पर ‘झूठ और जुमलों की बारिश’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार आने से पहले उन्हें अपने पुराने भाषण और वादे ज़रूर सुनने चाहिए।
तेजस्वी यादव के सवालों की झड़ी ने एनडीए सरकार की दो दशक की उपलब्धियों पर सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में पूछा—
🔴 तेजस्वी यादव के प्रमुख सवाल:
- क्या आप बिहार में अपने पुराने भाषण सुनेंगे और खुद शर्मिंदा होंगे?
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क्या इस बार फिर 2015 से अब तक की झूठी घोषणाओं का दोहराव होगा?
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20 वर्षों की डबल इंजन सरकार के बावजूद बिहार विकास के हर पैमाने पर पीछे क्यों है?
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क्या आप सारण प्रमंडल में लालू प्रसाद यादव द्वारा स्थापित विकास कार्यों की जानकारी देंगे?
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क्या आप बताएंगे कि एनडीए के शासन में 65,000 से ज्यादा हत्याएं और 25,000 बलात्कार क्यों हुए?
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क्या आप नीतीश कुमार की ‘अचेत राजनीतिक अवस्था’ पर बोलेंगे जैसे आपने नवीन पटनायक पर बोला था?
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क्या आप एनडीए के ‘नेशनल दामाद आयोग’ में शामिल जमाईयों को सम्मानित करेंगे?
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क्या आप बिहार की ध्वस्त कानून व्यवस्था और मुख्यमंत्री आवास के बाहर गोलीबारी की घटनाओं की निंदा करेंगे?
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क्या आप 20 वर्षों के दौरान हुए 2 लाख करोड़ से अधिक के घोटालों की सूची जनता को बताएंगे?
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क्या आप गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी बोलेंगे?
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क्या आप बताएंगे कि सरकारी कर्मचारियों और गरीबों पर रैली की भीड़ लाने का दबाव क्यों डाला जा रहा है?
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क्या आप बताएंगे कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ट्रंप के सीज़फायर आदेश पर सेना को क्यों रोका गया?
तेजस्वी यादव ने अपने ट्वीट में तीखे व्यंग्य करते हुए प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे “त्रेता या द्वापर युग में विचरण” करने के बजाय वर्तमान के ज्वलंत मुद्दों पर जवाब दें।
🔴 विपक्ष का हमला, सत्ता की चुप्पी?
तेजस्वी यादव के इन सवालों पर अभी तक भाजपा या जदयू की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सियासी गलियारों में इस ट्वीट की खूब चर्चा हो रही है। बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तपिश लगातार बढ़ती जा रही है।


























