पटना, 29 जनवरी 2026/कांग्रेस और राजद जैसी पार्टियाँ दशकों से पिछड़े, अति पिछड़े, दलित, महादलित, दबे-कुचले, शोषित और कमजोर वर्गों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती रही हैं। इन वर्गों के नाम पर राजनीति तो की गई, लेकिन उनके जीवन में वास्तविक बदलाव लाने की न तो नीयत दिखी और न ही ठोस इच्छाशक्ति।
इन दलों की राजनीति का चरित्र स्पष्ट रहा है—गरीबी, जाति और पिछड़ेपन को मुद्दा बनाकर सत्ता हासिल करना, लेकिन सत्ता में आते ही वही वर्ग हाशिये पर धकेल दिए जाते रहे। न शिक्षा में गुणात्मक सुधार हुआ, न स्थायी रोजगार के अवसर बने, न सामाजिक सम्मान और सुरक्षा की गारंटी दी गई। यही कारण है कि आज भी इन वर्गों में सबसे अधिक गरीबी, अशिक्षा और असुरक्षा देखी जाती है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर कांग्रेस और राजद की नीतियों पर जाती है।
इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने इन वर्गों को दया के पात्र नहीं, बल्कि विकास के भागीदार के रूप में देखा है। चाहे उज्ज्वला योजना के तहत रसोई में सम्मान हो, प्रधानमंत्री आवास योजना से सिर पर छत की सुरक्षा, आयुष्मान भारत से स्वास्थ्य का भरोसा, जन-धन और मुद्रा योजना से आर्थिक आत्मनिर्भरता, या फिर छात्रवृत्ति, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर—हर योजना के केंद्र में वही वर्ग रहे हैं जिन्हें पहले केवल नारे दिए गए थे।
मोदी सरकार की सबसे बड़ी विशेषता रही है कि योजनाएँ कागज़ों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लाभ सीधे जरूरतमंद तक पहुँचा, जिससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर निर्णायक प्रहार हुआ। यही कारण है कि आज गरीब, पिछड़ा, दलित और वंचित वर्ग यह महसूस करता है कि सरकार उनकी है, उनके लिए काम कर रही है।
इसी भरोसे, पारदर्शिता और विकासशील सोच के कारण आज देश के सभी वर्गों का विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कायम है। यह विश्वास किसी भाषण या प्रचार से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखते परिणामों से बना है। देश अब पहचान की राजनीति नहीं, परिणाम की राजनीति चाहता है—और यही एनडीए सरकार की असली ताकत है।
कांग्रेस और राजद को अब यह समझ लेना चाहिए कि पिछड़े और वंचित समाज को भ्रमित करने का दौर समाप्त हो चुका है। आज का भारत जागरूक है, आत्मसम्मानी है और विकास के साथ खड़ा है—और यही कारण है कि देश का विश्वास मजबूती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है।




























