प्रियंका भारद्वाज/रामेश्वर महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा किशोरी सिन्हा सभागार में छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद की जयंती एवं जयशंकर प्रसाद का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया ।
परिचर्चा का विषय प्रवेश कराते हुए हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संदीप कुमार सिंह ने बताया कि जयशंकर प्रसाद की कविताओं में छायावादी काव्य का वैभव अपनी उत्कृष्टता के साथ प्रकट होता है और उनका सौंदर्य-बोध उनकी रचनाओं में देखा जा सकता है । उनकी रचनाओं में सौंदर्य, दर्शन और श्रृंगारिकता, स्वानुभूति, जड़ चेतन संबंध और आध्यात्मिक दर्शन, नारी की महत्ता, मानवीयता, प्राकृतिक अवयव, चित्रात्मकता आदि दिखाई पड़ती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो.(डॉ.) श्यामल किशोर ने कहा कि जयशंकर प्रसाद का दर्शन मुख्य रूप से आनंदवाद और समरसता पर आधारित है, जो भारतीय संस्कृति और शैव दर्शन से प्रभावित है। उनका मानना है कि हृदय और बुद्धि के संतुलन से ही जीवन में असीम आनंद की प्राप्ति की जा सकती है। ‘कामायनी’ में उन्होंने हृदय और बुद्धि के समन्वय पर बल दिया है। प्रसाद जी हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक थे, उनकी रचनाओं ने न केवल काव्य की परिभाषा को नया स्वरूप दिया, अपितु उसे संवेदनशीलता, आध्यात्मिकता और दर्शन का सशक्त माध्यम भी बनाया ।
अपने विशिष्ट वक्तव्य में दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो.रजनी रंजन ने जयशंकर प्रसाद के दर्शन पर बात करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में उनका दार्शनिक पक्ष खुलकर सामने आता है । उनका दर्शन समरसतावाद पर आधारित है ।
कार्यक्रम के संयोजक हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ.उपेंद्र प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि जयशंकर प्रसाद की रचनाओं में उनके काव्य-सौंदर्य की भाषा की मधुरता, भावनाओं की गहराई और प्रकृति के चित्रण में स्पष्ट रूप से प्रकट होता है । उनकी भाषा तत्समपरक और संस्कृतनिष्ठ है। वैयक्तिकता, भावात्मकता, संगीतात्मकता, कोमलता, ध्वन्यात्मकता, नाद-सौंदर्य जैसे गीति शैली के सभी तत्त्व उनके काव्य में मौजूद हैं।
हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ.अभिनय कुमार ने बताया कि जयशंकर प्रसाद ने अपने लेखन में प्रबंध और मुक्तक दोनों शैलियों का प्रयोग किया है । प्रसाद जी का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद प्राचीन भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं तथा उदात्त मूल्यों को पुनर्जीवित कर पराधीन भारत में स्वाभिमान व एकता जगाना था, जो उन्होंने अपनी रचनाओं में बखूबी दर्ज़ किया है ।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ.शारदा नंद सहनी, डॉ.उपेंद्र गामी, डॉ. सुमित्रा कुमारी, डॉ. धीरज कुमार सिंह, डॉ.बादल कुमार, डॉ.अंबुजेश कुमार मिश्र, डॉ.माहेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ.अविनाश कुमार, डॉ.अविनाश कुमार झा, डॉ.अखिलेंद्र कुमार सिंह, डॉ.वसीम रजा, डॉ. मीरा कुमारी, डॉ.उमेश कुमार शुक्ल सहित सीतेश कुमार, रीतेश रंजन, रजनीश कुमार, प्रशांत, किशन तथा छात्र – छात्राओं में रजनी कुमारी,अमरजीत कुमार, सोनू कुमार, रोहित कुमार,अलका कुमारी, नेहा कुमारी, स्नेहा कुमारी, हेमा कुमारी, मुस्कान कुमारी, स्वाति कुमारी, राजनंदनी कुमारी, कंचन कुमारी, स्नेहा कुमारी,पूजा कुमारी, अंगूरी खातून सहित बड़ी संख्या में उपस्थित रहे ।
डॉ. संदीप कुमार सिंह,मीडिया प्रभारी – रामेश्वर महाविद्यालय मुजफ्फरपुर ।





























