प्रियंका भारद्वाज /रामेश्वर महाविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा किशोरी सिन्हा सभागार में शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन और दूरस्थ शिक्षा की भूमिका विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन प्राचार्य प्रो.(डॉ.) श्यामल किशोर की अध्यक्षता में किया गया ।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.(डॉ.) अभय कुमार सिंह तथा मुख्य वक्ता इग्नू दरभंगा के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. संतन कुमार राम तथा विशिष्ट वक्ता सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ.आकाश अवस्थी रहे ।
विषय प्रवेश कराते हुए सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. आकाश अवस्थी ने अपने वक्तव्य में ओडीएल, कर्मयोगी, मूक्स, स्वयं के साथ ही साथ विभिन्न प्रकार के डिजिटल प्लेटफार्मों पर विस्तार से चर्चा की । डॉ. अवस्थी ने कहा कि हम विभिन्न प्रकार के तकनीकी सहायता से अपनी शिक्षा को पूरी कर सकते हैं । डिजिटलीकरण ने शिक्षा को सर्वसुलभ बनाया ।
नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.(डॉ.) अभय कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा में डिजिटलीकरण से संस्थानों के ब्रांड की विश्वसनीयता में काफी वृद्धि हो सकती है, क्योंकि यह वर्तमान समय में नवाचार और शिक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है । डिजिटलीकरण शिक्षा में मूल्यांकन को बदल देता है , जिससे विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का प्रारूप, स्वचालित ग्रेडिंग और व्यक्तिगत शिक्षण जैसे लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं । डिजिटल उपकरण शिक्षकों को इंटरैक्टिव मूल्यांकन करने, ग्रेडिंग को सुव्यवस्थित करने और अनुकूलित शिक्षण रणनीतियों के लिए जानकारी जुटाने में सक्षम बनाते हैं। इससे मूल्यांकन अधिक कुशल और प्रभावी बनकर छात्र और शिक्षक दोनों के अनुभव बेहतर करता है । प्रो. सिंह ने महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर के विभिन्न अकादमिक कार्ययोजनाओं की भूरि – भूरि प्रशंसा की ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो.(डॉ.) श्यामल किशोर ने अपने संबोधन में बताया कि शिक्षा में डिजिटलीकरण की भूमिका के समावेश ने पारंपरिक बाधाओं को तोड़ दिया है, जिससे सीखना अधिक सुलभ और प्रभावी हो गया है। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन, किफायती इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग से देशभर के छात्र डिजिटल कक्षाओं में शामिल हो पाते हैं । स्वयं, दीक्षा और नेप्टल जैसे प्लेटफॉर्म शीर्ष संस्थानों द्वारा निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं, इससे विद्यार्थी भौगोलिक बाधाओं के बिना अपने कौशल को बढ़ा सकते हैं और अपने शैक्षणिक लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं ।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता इग्नू दरभंगा के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. संतन कुमार राम ने अपने अभिभाषण में बताया कि डिजिटल परिवर्तन को अधिक सुगम और सार्थक बनाने के लिए एक स्पष्ट डिजिटल रणनीति पर कार्य करना होगा । उन्होंने कहा कि किसी भी नए टूल को प्रयोग में लाने से पहले, यह जानना ज़रूरी है कि हम किस लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। क्या हमारा लक्ष्य छात्रों को पढ़ाई में अधिक सक्रिय बनाना है । डिजिटल परिवर्तन शिक्षा का कोई त्वरित समाधान नहीं है, बल्कि संस्थानों के कामकाज, शिक्षण और संपर्क के तरीकों में एक निरंतर बदलाव है। इस माध्यम से यह छात्रों तक पहुँचने, कक्षाओं का प्रबंधन करने के नए तरीके लाता है ।
कार्यक्रम की संयोजक तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ.महजबीन परवीन ने इस प्रकोष्ठ के भविष्य की कार्ययोजनाओं पर सभी शिक्षकों, छात्र – छात्राओं को अवगत कराया ।
कार्यक्रम में आगत अतिथियों द्वारा महाविद्यालय के न्यूज़ लेटर अक्षरामृत के द्वितीय अंक अक्टूबर – दिसंबर का लोकार्पण किया गया । अतिथियों ने महाविद्यालय के इस न्यूज़ लेटर की प्रशंसा की ।
स्वागत वक्तव्य महाविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो.(डॉ.) रजनी रंजन ने दिया । तथा संचालन हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. उपेंद्र प्रसाद ने तथा धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ.शारदा नंद सहनी ने किया । इस अवसर पर नूर अफ़्सा, और ऋचा कुमारी को सम्मानित किया गया ।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ.उपेंद्र गामी, डॉ. शारदा नंद सहनी, डॉ. गोवर्धन, डॉ.संदीप कुमार सिंह, डॉ .अभिनय कुमार, डॉ. बादल कुमार, डॉ. धीरज कुमार सिंह, डॉ. पूनम कुमारी, डॉ.मीरा कुमारी, डॉ. अविनाश कुमार झा, डॉ.अखिलेंद्र कुमार सिंह,डॉ. सर्वेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ. वसीम रजा, डॉ. माहेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ ऐनी जोया, डॉ. अंबुजेश कुमार मिश्र, कर्मचारियों में सीतेश कुमार, रीतेश रंजन, रजनीश कुमार, प्रशांत कुमार, किशन,अभिषेक तथा छात्र – छात्राओं में रजनी कुमारी, कीर्ति, सुहानी,मुस्कान सहित बड़ी संख्या में उपस्थित रही ।
°°°°°°डॉ. संदीप कुमार सिंह सहायक प्राध्यापक – हिंदी विभाग मीडिया प्रभारी – रामेश्वर महाविद्यालय मुजफ्फरपुर ।




























