06 अप्रैल 2026, पटना। जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता डाॅ0 निहोरा प्रसाद यादव ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा बिहार के विकास के मुद्दे पर सत्ता पक्ष से सार्वजनिक बहस की चुनौती पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जद(यू) का साधारण कार्यकर्ता भी विकास के मुद्दे पर तेजस्वी यादव से खुली बहस के लिए पूरी तरह तैयार है।
तेजस्वी यादव को सच्चाई का आइना दिखाते हुए उन्होंने कुछ आंकडों का हवाला दिया और कहा कि–
1. वर्ष 2005 में बिहार की साक्षरता दर लगभग 43 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर करीब 79 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
2.लालू-राबड़ी शासनकाल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत इतनी खराब थी कि एक महीने में औसतन केवल 39 मरीज ही इलाज के लिए पहुंचते थे, जबकि आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में यही संख्या बढ़कर 11 हजार से अधिक मरीज प्रति माह हो चुकी है।
3. वर्ष 1990 से 2005 तक लालू-राबडी शासनकाल में केवल लगभग 94 हजार सरकारी नौकरियां दी गईं, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में 10 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां देने का ऐतिहासिक काम किया गया है। साल 2025 से 2030 के बीच 1 करोड़़़ युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है।
4. आरजेडी शासनकाल में बिहार की कृषि विकास दर -0.01 प्रतिशत थी, जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में बढ़़़कर 9.45 प्रतिशत हो गई है।
5. उन्होंने कहा कि आरजेडी शासनकाल में बिहार की प्रति व्यक्ति आय महज 7 हजार 449 रुपये थी, जबकि आज यह बढ़़कर करीब 76 हजार रुपये के आसपास पहुंच गई है।
6. इसी तरह राज्य की गरीबी दर 54.40 प्रतिशत से घटकर 33.76 प्रतिशत हो गई है, जो बताता है कि गरीबों के जीवन में वास्तविक बदलाव आया है।
7. लालू-राबड़़़़़ी शासनकाल में बिहार में प्रति व्यक्ति बिजली खपत केवल 75 किलोवाट थी, जबकि आज यह बढ़़़़कर 363 किलोवाट तक पहुंच गई है।
8. शिक्षा के क्षेत्र में उस समय जहां कुल खर्च लगभग 3 हजार 160 करोड़़ रुपये था, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में यह बढ़़़़कर 63 हजार 335 करोड रुपये तक पहुंच गया है।
9. इसी प्रकार स्वास्थ्य पर लालू शासनकाल में केवल 539 करोड रुपये खर्च होते थे, जबकि आज यह बढ़कर 19 हजार 184 करोड़़़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि यही फर्क जंगलराज और विकासराज के बीच की असली पहचान है।
उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को अपने माता-पिता के 1990 से 2005 तक के शासनकाल के विकास के आंकड़े भी सार्वजनिक करने चाहिए और बताना चाहिए कि उस दौरान बिहार को क्या मिला? उन्होंने कहा कि झारखंड अलग होने के बाद बिहार निराशा, संसाधनों की कमी और पिछड़़ेपन से जूझ रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उस निराशा को विकास और आत्मविश्वास में बदलने का काम किया। इसके बावजूद तेजस्वी यादव बिहार की तुलना सीधे विकसित राज्यों से कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार बिहार को विकसित राज्य के शिखर तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रही है और इसमें थोड़़़ा समय लगना स्वाभाविक है।























