सनातन संस्कृति के महान अध्येता और नुतनता के पक्षधर थे आचार्य देवेंद्रनाथ शर्मा /जयंती पर डा प्रेम नारायण सिंह की पुस्तक ‘सनातन के वृहत्तर आयाम’ का हुआ लोकार्पण
पटना, ६ जुलाई। हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेज़ी के उद्भट विद्वान और महान साहित्य-सेवी आचार्य देवेंद्रनाथ शर्मा वैदिक-साहित्य और सनातन संस्कृति के महान अध्येता थे। किंतु वे नुतनता और प्रगति के भी पक्षधर थे। उनका मानना था कि वेद-उपनिषद हमें जड़ नहीं, चेतन…
अनेक अलक्षित साहित्यकारों को अंधेरों से निकाला था डा सुरेंद्र प्रसाद जमुआर ने – सर्जन ही नहीं सर्जक भी थे डा जितेंद्र सहाय, गीत-ऋषिका थी डा शांति जैन – जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने श्रद्धापूर्वक तीनों विभूतियों को किया स्मरण, दी काव्यांजलि
पटना, ३ जुलाई। अनेक अलक्षित साहित्यकारों को अंधेरों से निकाला था डा सुरेंद्र प्रसाद जमुआर ने। वे एक ऐसे विनम्र साधक थे, जिन्होंने कठोर श्रम कर बिहार के सैकड़ों भुला दिए गए साहित्यकारों को न केवल श्र्द्धापूर्वक स्मरण किया बल्कि उनके महान कार्यों से संसार…
कबीर की तरह अक्खड़ और फक्कड़ किंतु जीवंत कवि थे नागार्जुन -जयंती की पूर्व संध्या पर साहित्य सम्मेलन ने किया श्रद्धापूर्वक स्मरण, आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना ब्यूरो, २९ जून। बाबा नागार्जुन एक जीवंत कवि थे। काव्य के पर्यायवाची थे। यह उनको देख कर ही समझा जा सकता था। संतकवि कबीर की तरह अक्खड़ और फक्कड़! खादी की मोटी धोती और गंजीनुमा कुर्ता! वह भी मोटे खादी का। बेतरतीब बिखरे बाल, बढ़ी हुई दाढ़ी और उसमें भी…
संसार भर के नेत्रहीनों और बधिरों की महान प्रेरणा-स्रोत हैं लेखिका हेलेन केलर जयंती पर, बिहार नेत्रहीन परिषद के तत्त्वावधान में साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ समारोह
पटना, २७ जून। संसार भर के नेत्रहीनों और बधिरों की महान प्रेरणा-स्रोत हेलेन ऐडम्स केलर कला में स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाली संसार की पहली बधिर और नेत्रहीन महिला थी, जिन्होंने अपने आत्म-बल से विश्व्ख्याती अर्जित करने में सफल रहीं। वो एक महान लेखिका,…
बिखरना या संवरना मनुष्य के हाथ में है: राघव ऋषि
ऋषि सेवा समिति, पटना के तत्वाधान मे चल रही में भागवत कथा के द्वितीय दिवस पूज्य ऋषि जी ने कहा माया को चाहने वाला बिखर जाता है और भगवान को चाहने वाला निखर जाता है। परीक्षित को श्राप हुआ अतः उसे भयमुक्त करने के लिए शुकदेव जी आते हैं। प्रभु मिलन की आतुरता के…
रामधारी प्रसाद ‘विशारद’ के उद्यम से हुई थी साहित्य सम्मेलन की स्थापना / साहित्य सम्मेलन में मनायी गयी १२५वीं जयंती
पटना, ११ जून। मनीषी विद्वान, उदारमना व्यवसायी और हिन्दी के अनन्य भक्त रामधारी प्रसाद ‘विशारद’ के सदप्रयास और सक्रियता से ही वर्ष १९१९ में बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना हुई थी। वे इसके मुख्य सूत्रधार थे। सबसे पहले इनके ही मन में…
कविता मनुष्यता की जननी है : नन्द किशोर यादव / ग़ज़ल-संग्रह ‘नीले आकाश का सरगम’ का हुआ लोकार्पण, विविध क्षेत्रों के मनीषियों का हुआ सम्मान
पटना, ८ जून। डा शंकर प्रसाद एक बहु आयामी व्यक्तित्व के धनी साहित्यकार हैं। कला, संगीत और साहित्य के साथ शिक्षा जगत की भी बड़ी सेवा के लिए सुख्यात श्री प्रसाद की ग़ज़लें पाठकों से सीधी वार्ता करती हैं। कविता और ग़ज़ल समाज को प्रभावित करती हैं। कविता को…
साहित्य सम्मेलन में आरम्भ होगी ‘कथयामि कथा’ ऋंखला, ‘मैं और मेरी कविता’ शीर्षक से एकल काव्य-पाठ भी
पटना, ३१ मई। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन जून माह से ‘कथयामि कथा’ शीर्षक से एकल कथा पाठ तथा ‘मैं और मेरी कविता’ शीर्षक से एकल काव्य-पाठ की दो ऋंखलाएँ आरंभ करने जा रहा है। ऋंखला की अलग-अलग कड़ियों में अलग-अलग कथाकार और कविगण,…
प्रकृति के महान चितेरे और मानवतावादी कवि थे सुमित्रानन्दन पंत /जयंती पर पत्रिका ‘दूसरा मत’ के ग़ज़ल विशेषांक का हुआ लोकार्पण, आयोजित हुई कवि-गोष्ठी
पटना, २० मई। हिन्दी काव्य-साहित्य में छायावाद-युग के प्रमुख स्तंभ के रप में परिगणित महकवि सुमित्रानन्दन पंत प्रकृति के महान चितेरे और मानवतावादी कवि थे। उनकी रचनाओं के विराट विस्तार में प्रकृति का चित्ताकर्षक चित्रण तो है ही, समाज की पीड़ा के साथ…
नहीं रहीं ‘जीवन है तो’ की कवयित्री डा सविता मिश्र ‘मागधी’ / एक माह पूर्व ही हुआ था पुस्तक का लोकार्पण, साहित्य सम्मेलन ने गहरा शोक व्यक्त किया
पटना, १५ मई। बहुचर्चित काव्य-कृति ‘जीवन है तो’ की रचनाकार हिन्दी की सुप्रसिद्ध कवयित्री डा सविता मिश्र ‘मागधी’ नहीं रहीं । ६० वर्ष की आयु में उन्होंने बुधवार की संध्या राजधानी के एक निजी अस्पताल में अपना शरीर छोड़ दिया।…
हिन्दी के युग-प्रवर्तक साहित्यकार थे आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी /जयंती पर डा सुषमा कुमारी की पुस्तक ‘पटकथा लेखन में कौशल अभिव्यक्ति’ का हुआ लोकार्पण
पटना, ९ मई। अपने युग की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को दिशा और दृष्टि प्रदान करने वाले युग-प्रवर्त्तक साहित्यकार थे आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी। हिन्दी भाषा और साहित्य के महान उन्नायकों में वरेण्य आचार्य द्विवेदी के महान साहित्यिक अवदानों के कारण ही,…
पटना /विश्व नृत्य दिवस के उपलक्ष्य में साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ ‘नृत्योत्सव-२०२५’, सम्मनित हुए कलाकार
पटना, २ मई। बंगाल की नृत्य-साधना में तपी सुचर्चित नृत्यांगना सोमा मण्डल और नृत्याचार्य रामचंद्र गोलदार के स्वर्गिक आनन्द प्रदान करने वाले नृत्य ने दर्शकों को घंटों मोहित किए रखा। उनके मोहक पद-संचालन के साथ दर्शकों के पाँव भी थिरकते रहे। अनेक एकल और…