पटना /हरिवंश नारायण बच्चन को समर्पित होगा साहित्य सम्मेलन का ४४वाँ महाधिवेशन, अमिताभ बच्चन होंगे मुख्य अतिथि
पटना, २३ मार्च । बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का ४४वाँ महाधिवेशन हिन्दी के यशस्वी कवि डा हरिवंश नारायण बच्चन को समर्पित होगा। दो दिवसीय इस महाधिवेशन के मुख्य अतिथि हिन्दी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन होंगे। महाधिवेशन में उद्घाटन और…
भगवती प्रसाद द्विवेदी होंगे बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के नए साहित्यमंत्री, कुमार अनुपम को बनाया गया प्रचार मंत्री
पटना, १७ मार्च। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की कार्यसमिति में एक संक्षिप्त परिवर्तन किया गया है। सुप्रसिद्ध साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी को सम्मेलन का नया साहित्यमंत्री बनाया गया है। सम्मेलन की कार्य समिति के सदस्य कुमार अनुपम को प्रचारमंत्री का…
गीत ग़ज़ल मंच के तत्त्वावधान में साहित्य सम्मेलन में हुआ भव्य वसंतोत्सव कवि-सम्मेलन, ‘कवि-कुल-गौरव’ और ‘कवि-कुल-चूड़ामणि’ अलंकरणों से विभूषित हुए अतिथि कवि एवं कवयित्रियाँ
पटना, १२ मार्च। अमेठी से पधारी अखिल भारतीय मंचों की सुचर्चित और सुकंठी शायरा संदल अफ़रोज़ ने जैसे ही यह शेर पढ़ा कि “वफ़ा का दीप जलाना है क्या किया जाय? ख़िलाफ़ सारा जमाना है क्या किया जाए?/ उन्हें ये ज़िद है कि इज़हार कीजिए ग़म का/ मुझे भी कौल निभाना है…
आदर्श स्थापित करने वाले व्यक्तियों की जीवनी प्रेरणादायिनी होती है : पूर्व राज्यपाल
पटना, ११ मार्च। जो व्यक्ति अपने जीवन से समाज में आदर्श की स्थापना करते हैं, उनकी जीवनी आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग-दर्शिका और प्रेरणा-दायिनी हो जाती है। जीवन में सफल व्यक्ति समाज को प्रेरणा देते हैं। सुप्रसिद्ध संस्कृति-कर्मी, कलाकार और कवि श्याम…
काव्य-साहित्य के प्रधान तत्त्व प्रेम, ऋंगार और लोक-मंगल हैं / ‘लेख्य-मंजूषा’ द्वारा साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ वासंती साहित्योत्सव
पटना, ९ मार्च। काव्य-साहित्य में प्रेम, ऋंगार और लोक-मंगल के भाव ही प्रधान तत्त्व हैं। प्रेम जीवनी शक्ति है। इसके अभाव में जीवन और संसार की कल्पना नहीं हो सकती। प्रेम पाकर मरणासन्न व्यक्ति भी जी उठता है। इसीलिए जीवन में प्रेम और ऋंगार का विशेष महत्त्व…
अक्षरों के भी अर्थ जानते थे महाकवि काशीनाथ पाण्डेय ,जयंती पर साहित्य सम्मेलन में दी गई काव्यांजलि-आयोजित हुई स्मृति व्याख्यान एवं काव्य-पाठ प्रतियोगिता
पटना, ९ मार्च। काव्य-साहित्य में प्रेम, ऋंगार और लोक-मंगल के भाव ही प्रधान तत्त्व हैं। प्रेम जीवनी शक्ति है। इसके अभाव में जीवन और संसार की कल्पना नहीं हो सकती। प्रेम पाकर मरणासन्न व्यक्ति भी जी उठता है। इसीलिए जीवन में प्रेम और ऋंगार का विशेष महत्त्व…
साहित्य सम्मेलन में आयोजित होगा भव्य राष्ट्रीय वासंतोत्सव कवि-सम्मेलन – डा कुँवर जावेद और शायरा संदल अफ़रोज़ की ग़ज़लों से गुलज़ार होगी महफ़िल
पटना, ७ मार्च। अखिल भारतीय गीत ग़ज़ल मंच के तत्त्वावधान में आगामी १२ मार्च को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के ऐतिहासिक सभागार में एक भव्य राष्ट्रीय वासंतोत्सव कवि-सम्मेलन और मुशायरा आयोजित हो रहा है, जिसमें देश के ९ नामचीन कवियों, शायरों और कवयित्रियों…
फणीश्वरनाथ रेणु के साहित्य में अंचल की व्यथा ही नही क्रांति के स्वर भी,जयंती पर साहित्य सम्मेलन में किए गए श्रद्धापूर्वक स्मरण, आयोजित हुई लघुकथा-गोष्ठी
पटना, ४ मार्च। महान कथा-शिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु के साहित्य में ग्राम्य-अंचल की व्यथा ही नहीं, विद्रोह और क्रांति के भी तप्ततीखे स्वर हैं। वे सीने में अग्नि को पोषित करने वाले, क्रांति-धर्मी कथाकार थे। जीवन भर संघर्ष-शील रहे। उनके हृदय की अग्नि लेखनी के…
सम्मेलन के ४३वें महाधिवेशन की सफलता के उपलक्ष्य में नृत्य-गीत-संगीत के साथ मनाया गया आनंदोत्सव, सम्मनित हुए साहित्यकार, जयन्ती पर स्मरण किए गए डा रवींद्र राजहंस, हुआ भव्य कवि-सम्मेलन
पटना, २ मार्च। हिन्दी को देश की राष्ट्रभाषा बनाए जाने के आंदोलन को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन से प्रचूर बल मिल रहा है। सम्मेलन द्वारा विगत वर्षों में आयोजित हुए महाधिवेशनों के माध्यम से इस आंदोलन का आरंभ हुआ और अब यह राष्ट्रीय-स्तर पर गंभीर चिंतन का…
साहित्य सम्मेलन में २ मार्च को मनाया जाएगा ‘आनंदोत्सव-२०२५’,’सम्मेलन-गौरव’, ‘सम्मेलन-सुधा’, ‘सम्मेलन-मार्तण्ड’ अलंकरणों से सम्मानित होंगे साहित्यकार
२४ फरवरी। सम्मेलन के ४३वें महाधिवेशन की व्यापक सफलता के उपलक्ष्य में आगामी २ मार्च को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में’आनंदोत्सव-२०२५’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें महाधिवेशन में मूल्यवान योगदान करने वाले विदुषी कवयित्रियों और मनीषी…
आचार्य नलिन नहीं होते तो रेणु भी ‘रेणु’ नहीं होते, चिंतक साहित्यकार थे डा रंगी प्रसाद रंगम रंगम जयंती पर साहित्य सम्मेलन किया श्र्द्धापूर्वक स्मरण, आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना, १९ फरवरी। चमत्कृत करने वाली प्रतिभा और विद्वता के कवि और काव्य में प्रपद्य-वाद के प्रवर्त्तक आचार्य नलिन विलोचन शर्मा आलोचना-साहित्य के शिखर-पुरुष थे। वे न होते तो श्रेष्ठ आँचलिक उपन्यासकारके रूप में हिन्दी साहित्य में प्रतिष्ठित हो जाने वाले…
भोपाल में ‘ललिता स्मृति सम्मान’ से विभूषित हुईं डा पूनम आनन्द साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ समेत अनेक साहित्यकारों ने दी बधाई
पटना, १७ फरवरी। बिहार की सुप्रसिद्ध लेखिका डा पूनम आनन्द को विश्व मैत्री मंच एवं हेमंत फ़ाउंडेशन के तत्त्वावधान में भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा प्रकाशित उनके लघुकथा-संग्रह ‘१२१ लघुकथाएँ’ के लिए…