कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी, पटना।जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, राज्य की राजनीति में जातीय गोलबंदी तेज़ होती जा रही है। हर वर्ग, हर जाति अपने-अपने संगठन और सम्मेलन के ज़रिए खुद को संगठित कर राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग को लेकर सक्रिय हो गया है।
इसी कड़ी में रविवार को पटना जिले के हॉट सीट मानी जाने वाली राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में माली समाज महासम्मेलन का आयोजन किया गया। पहाड़पुर गांव में आयोजित इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में माली समाज के लोगों ने भाग लिया। सम्मेलन का नेतृत्व कर रहे समाज के प्रमुख नेता पृथ्वी माली ने कहा कि माली समाज की जनसंख्या बिहार के हर गांव में अच्छी-खासी है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टि से यह समाज आज भी पिछड़ा हुआ है।
पृथ्वी माली ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि – “हमारे समाज के लोग आज भी पारंपरिक पेशे से जुड़े हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से हाशिए पर हैं। अब समय आ गया है कि हमें भी हमारी आबादी के अनुपात में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में टिकट मिले।”
इस अवसर पर राघोपुर के पूर्व विधायक सतीश राय ने भी माली समाज को एकजुट होकर राजनीतिक भागीदारी के लिए संघर्ष करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि – “राघोपुर में माली समाज की जनसंख्या प्रभावशाली है, इसलिए उन्हें अब चुप बैठने की जगह राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।”
महासम्मेलन को संबोधित करते हुए पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार, राजा सुरेंद्र मोहन, रविंद्र भगत, बलु भगत, जय कुमार रत्न, नबल भगत, गौतम माली और विनोद भगत ने माली समाज को जागरूक और संघर्षशील बनने का आह्वान किया। वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि – “इस राज्य में बिना मांगे और बिना संघर्ष के कुछ नहीं मिलता। इसलिए माली समाज को अपना हक पाने के लिए संगठित होकर आवाज़ उठानी होगी।”
बिहार में चल रही जातीय गतिविधियों की यह हलचल बताती है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में जाति आधारित समीकरण और भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इंडिया गठबंधन और राजद जैसे दलों में टिकट की दौड़ में भी अब जातिगत समीकरणों को लेकर गहमागहमी बढ़ गई है।
(रिपोर्ट: कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी, राघोपुर/पटना)





























