Kaushlendra Pandey/जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता श्री हिमराज राम ने मीडिया में जारी बयान में राहुल गांधी की 17 अगस्त से शुरु होने वाली वोट अधिकार यात्रा पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि रोहतास से शुरु हो रही उनकी यात्रा की असलियत बिहार की जनता बखूबी समझती है और आगामी विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को राजनीतिक सबक सिखाने का काम करेगी। रोहतास से यात्रा की शुरुआत राहुल गांधी की महज एक चुनावी नौटंकी है, ताकि दलित वोट बैंक को साधा जा सके। कांग्रेस का इतिहास दलितों के साथ छल, भेदभाव और विश्वासघात से भरा पड़ा है।
उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने अधिकार और सम्मान दिलाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ही साझीदार लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल में गरीबी और पिछड़ेपन के चलते दलित समुदाय में हाशिए पर चला गया था उसे आज माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने समाज में ऊंचा उठाने का काम किया है।
मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार दलितों के स्वाभिमान एवं उनके सामाजिक,राजनीतिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के पर्याय हैं। उन्होंने कहा कि बिहार वह एकमात्र राज्य है जहां दलित समुदाय के बुजुर्गों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने का गौरव प्राप्त है। यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और संवैधानिक समता का जीवंत उदाहरण है। इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मुख्य सचिव और डीजीपी जैसे शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहते हैं। प्रखंड स्तर तक के तमाम अधिकारी दलित बुजुर्ग को सैल्यूट करते हैं। यह दृश्य खुद बोलता है कि बिहार में सामाजिक न्याय केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहारिक धरातल पर स्थापित हो चुका है।
पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि साल 2005 में सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने दलितों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उत्थान के लिए कई बड़े फैसले लिए। दलितों के उत्थान के लिए विभागीय बजट को बढ़ाया गया। साल 2005-06 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए जहां कुल 40 करोड़ 48 लाख करोड़ रुपया का वार्षिक योजना बजट था, वहीं मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के शासनकाल के दौरान साल 2023-24 में वो बढ़कर कुल 1 हजार 800 करोड़ 55 लाख रुपया हो गया। दलित समुदाय के उत्थान के लिए राज्य के सभी जिलों में विशेष तौर पर एससी/एसटी थानों की व्यवस्था की गई साथ ही इस समुदाय के पीड़ित लोगों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए अलग से कोर्ट की व्यवस्था की गई साथ ही इन न्यायलयों में स्पेशल पीपी की व्यवस्था की नियुक्ति की गई है जिससे आज दलितों को त्वरित न्याय मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज दलितों के खिलाफ हुए अत्याचार को लेकर आरोपियों के खिलाफ 60 दिनों के अंदर आरोप पत्र गठित किया जा रहा है। ये दर्शाता है कि मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की सरकार दलितों के कल्याण एवं उन्हें तय सीमा के अंदर न्याय सुनिश्चित करने को लेकर कितने गंभीर हैं।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस ने काका कालेलकर आयोग और मंडल कमीशन की रिपोर्ट को दबाने का काम किया और उसे लागू नहीं किया जिससे वंचितों का उनका सांविधानिक हक नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि आज महज वोट बैंक के लिए जातीय गणना कराने का बात करने वाली कांग्रेस ने कभी भी अपने शासन में पूरे देश में जाति आधारित गणना नहीं करायी और लोगों को ठगने का काम किया। उन्होंने कहा कि साल 2011 में जब कांग्रेस की सरकारी थी तो जनगणना के दौरान दलित समुदाय की भी गणना का काम किया गया था लेकिन कांग्रेस ने उस आंकड़े को कभी सार्वजनिक करने का काम नहीं किया।
केंद्र में कांग्रेस शासनकाल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय भर्तियों में दलितों के लिए आरक्षित सीटों पर भी कांग्रेस सरकार ने पांच प्रतिशत सीटों को भी भरने का काम नहीं किया एवं उन्हें सरकारी नौकरी से वंचित रखा। कांग्रेस के शासनकाल में दलितों को शिक्षा, रोज़गार, और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित रखा गया। अब चुनावी मौसम में दलितों के हक़ की बातें करना, कांग्रेस की पुरानी आदत, चुनाव आते ही वादों की बरसात और सत्ता मिलते ही वादों का गला घोंटना का एक और उदाहरण है।





























