प्रियंका भारद्वाज/मुजफ्फरपुर/रामेश्वर महाविद्यालय में स्नातक के नए सत्र 2025-29 के छात्रों का सोमवार को दीक्षारंभ समारोह हुआ। मुख्य अतिथि टीपीएस कॉलेज के पूर्व प्राध्यापक व रंगकर्मी प्रो.जावेद अख्तर खां ने कहा कि आग से सभ्यता का विकास हुआ, और भाषा जब सामने आई तब संस्कृति का निर्माण हुआ। जिस संस्कृति की हम बात करते है वह शिक्षा से है। अगर भाषा का सामान्य स्तर भी न हो तो जो कुछ भी कहा जा रहा है वह ग्रहण नहीं कर पाएंगे। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा जब आप कॉलेज में आ गए मतलब स्वायत्त या स्वाधीन इलाके में आ गए। ज्ञान की स्वायत्तता को समझना होगा। स्वाधीन मस्तिष्क होंगे तो स्वाधीन विचार होंगे। उन्होंने कहा कि हम एआई के युग में आ गए हैं। इतनी सूचनाएं आ रही है कि हम उसे प्रोसेस नहीं कर पा रहे हैं। आपने हिंसा का इतना वीडियो देखा कि जो दूसरी हिंसा हो रही है उसके प्रति हमारी संवेदना ही कम हो गई। साहित्य दर्शन इसी संवेदना को फिर से जगाता है। एआई के जमाने में जिसके पास जितना ज्यादा डेटा है, वह उतना पावरफुल है और जिसके पास जितना कम डेटा है, वह उतना कमजोर देश है। अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर ने कहा कि यह ज्ञान का मंदिर है जिस तरह आप मंदिर में जाते हैं उसी भाव से कॉलेज में छात्र आएं। आपका आचरण ही आपकी पहचान बनेगी। जो ज्ञान अर्जित करेंगे उससे व्यवहारिक व आध्यात्मिक स्तर दोनों के लिए शिक्षा अनिवार्य है। छात्र जिज्ञासा को मरने न दें क्योंकि जिज्ञासा ही व्यक्ति को महान बनाता है। उन्होंने छात्रों से स्पष्ट कहा कि नियमित कक्षाओं अवश्य आएं। उपस्थित कम होने पर अभिभावकों को इसकी जानकारी दी जाएगी और परीक्षा फॉर्म भरने से रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि एनसीसी या एनएसएस से जुड़िये। कहा कि कॉलेज परिसर भले छोटा हो लेकिन ज्ञान में कमी नहीं होगी। अकादमिक रूप से कॉलेज तत्पर रहेगा। स्वागत दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो.रजनी रंजन ने किया। डॉ.धीरज कुमार ने नई शिक्षा नीति के बारे में पीपीटी के माध्यम से विस्तार से समझाया। संचालन डॉ.उपेंद्र प्रसाद ने किया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए पूर्व प्राचार्य प्रो. ब्रह्मचारी व्यास नंदन शास्त्री ने कहा कि दीक्षारंभ वैदिक परंपरा है।महान् शिक्षाविद् महर्षि दयानन्द सरस्वती ने सत्यार्थ प्रकाश के द्वितीय समुल्लास में कहा है कि माता , पिता और आचार्य इन तीन गुरुओं द्वारा ही मानव का निर्माण होता है।मौके पर डॉ.शारदानंद सहनी, डॉ.उमेश कुमार शुक्ला, डॉ.मैहजबीन परवीन, डॉ.सुमित्रा कुमारी, डॉ.बादल कुमार, डॉ.वसीम रेजा, डॉ. डॉ. रणवीर कुमार, डॉ.मीरा कुमारी, डॉ. अभिनय कुमार, डॉ. चिन्मय प्रकाश, डॉ. राजबली राज, डॉ. अभिषेक रंजन, डॉ. अविनाश कुमार झा, डॉ.अविनाश कुमार, डॉ.स्मृति चौधरी, डॉ.पीएन शर्मा, डॉ.मयंक मौसम, डॉ.रीता कुमारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे।




























