Kaushlendra pandey /पटना, 06 सितम्बर 2025/जद (यू) प्रदेश कार्यालय में फेसबुक लाइव का आयोजन किया गया जिसका विषय था नीतीश कुमार बिहार के लिए जरुरी क्यों? इस सोशल संवाद को पार्टी प्रदेश प्रवक्ता डाॅ0 निहोरा प्रसाद यादव ने संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि बिहार में आज जो परिवर्तन दिख रहा है, उसका श्रेय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदृष्टि और मेहनत को जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि 2005 से पहले बिहार की स्थिति भयावह थी। शाम के बाद लोग घर से निकलने से डरते थे, अपराधियों का बोलबाला था, प्रशासन पंगु था और कर्मचारियों को वेतन तक समय पर नहीं मिल पाता था। सड़कों की हालत इतनी जर्जर थी कि लोग मजाक में कहते थे कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढे में सड़क।
ऐसे कठिन हालात में नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली और सबसे पहले कानून-व्यवस्था को दुरुस्त किया। अपराधियों पर नकेल कसी और समाज को भयमुक्त बनाया। इसके बाद उन्होंने सड़कों का कायाकल्प किया और गांव-गांव को सड़क से जोड़ा। बिजली के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार करते हुए उन्होंने बिहार को अंधेरे से बाहर निकाला। कभी ग्रामीण इलाकों में केवल दो घंटे और शहरों में छह से आठ घंटे बिजली मिलती थी, वहीं आज हर घर में चैबीसों घंटे बिजली पहुंच रही है। हाल ही में 125 यूनिट बिजली मुफ्त देने का निर्णय गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत देने वाला साबित हुआ है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक बदलाव हुए। 2005 में बिहार की साक्षरता दर सिर्फ 34 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो चुकी है। तकनीकी, मेडिकल और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बिहार को हब बनाने की दिशा में काम हुआ है। महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक ताकत देने के लिए पंचायत और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण, सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण, मातृत्व अवकाश को 180 दिन और शिशु देखभाल अवकाश को 730 दिन कर दिया गया। मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजनाओं और छात्रवृत्तियों से लाखों बेटियों को पढ़ाई और रोजगार का अवसर मिला है।
अल्पसंख्यकों और अति पिछड़ों के उत्थान के लिए भी सरकार ने ऐतिहासिक पहल की है। कब्रिस्तानों की घेराबंदी से लेकर अल्पसंख्यक छात्रावास, छात्रवृत्तियां और विशेष योजनाएं लागू की गईं, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को सम्मान और अवसर मिला।
कृषि के क्षेत्र में नीतीश कुमार सरकार ने रोड मैप बनाकर उत्पादन में क्रांतिकारी बढ़ोतरी की। धान का उत्पादन 26.22 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 195.95 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा, गेहूं का उत्पादन 32.79 से बढ़कर 73.07 लाख मीट्रिक टन हो गया और मक्का का उत्पादन 14.51 से बढ़कर 58.61 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। बिहार आज लीची, मखाना और मशरूम उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। दूध उत्पादन 47.43 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 128.52 लाख मीट्रिक टन हो चुका है, अंडा उत्पादन 79 करोड़ से बढ़कर 344 करोड़ का हो गया है और मछली उत्पादन 2.68 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 9.6 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा है। यह सभी उपलब्धियां किसानों को प्रोत्साहित करने और कृषि को आत्मनिर्भर बनाने का परिणाम हैं।
विपक्ष के बेरोजगारी संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि सीएमआईई की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि बिहार में बेरोजगारी 17.6 प्रतिशत है, जबकि हरियाणा, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और सिक्किम जैसे राज्यों की तुलना में यह स्थिति बेहतर है। आने वाले पांच वर्षों में सरकार 1 करोड़ नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
उन्होंने कहा कि 2005 से 2025 तक का काल बिहार में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और महिला सशक्तिकरण के लिए जाना जाएगा। अब 2025 से 2030 का काल औद्योगीकरण का होगा। उद्योग स्थापित होंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेगे और बिहार नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पूरे जीवन को बिहार की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। उनकी स्वच्छ छवि, सुशासन का माॅडल और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता ही कारण है कि आज बिहार को देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया आदर की दृष्टि से देख रही है। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव में जनता को भ्रम फैलाने वालों के झांसे में नहीं आना चाहिए और नीतीश कुमार के हाथों को मजबूत करना चाहिए ताकि बिहार विकास की नई उड़ान भर सके।



























