सौरभ निगम — अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने “विकसित भारत 2047 के लिए अभिसरण” विषय पर एक उद्योग सम्मेलन आयोजित किया, जिसका उद्देश्य कौशल और रोजगार के आयामों को प्रधानमंत्री विकास (पीएम विकास) योजना के संदर्भ में आगे बढ़ाना है।
महत्वपूर्ण अंश
यह सम्मेलन नई दिल्ली में, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (डीएसजीएमसी) और त्रिपुरा के स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम) के सहयोग से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य एवं मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने की।
श्री कुरियन ने कहा कि उद्योग सहयोग ही एक विश्व-स्तर पर प्रतिस्पर्धी एवं कुशल कार्यबल तैयार करने की आधारशिला है, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को व्यवहार में लाया जा सके।
उन्होंने विशेष रूप से ऑटोमेशन, नई तकनीकों और आधुनिक रोजगार भूमिकाओं की महत्ता पर बल दिया।
सम्मेलन में स्वास्थ्य सेवा, विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यटन एवं आतिथ्य समेत कुल 11 सेक्टरों से उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
दो समझौता ज्ञापनों (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए:
1. अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, डीएसजीएमसी और वधवानी फाउंडेशन के बीच
2. डीएसजीएमसी और एसआईएचएम त्रिपुरा के बीच
ये MOU उद्योग–प्रशिक्षण संबंधी भागीदारी को सुदृढ़ करने एवं पीएम विकास के उद्देश्य को आगे बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर हैं।
सम्मेलन में “उद्योग के लिए तैयार और विश्व स्तर पर गतिशील कार्यबल का निर्माण: समावेशी विकास और विकसित भारत 2047 के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना” विषय पर पैनल चर्चा हुई।
पैनल में शामिल हुए:
• श्री सी. पी. एस. बख्शी, संयुक्त सचिव (कौशल)
• श्री राम सिंह, संयुक्त सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय
• कर्नल महेंद्र सिंह पायल (सेवानिवृत्त), कार्यकारी उपाध्यक्ष, NSDC
• कर्नल संतोष कुमार (सेवानिवृत्त), उपाध्यक्ष SDN, वधवानी फाउंडेशन
• श्री सतविंदर सिंह, प्रबंध निदेशक, NITCON Ltd.
• श्री संजीव कुमार, CMD, Telecommunications Consultants India Ltd.
• श्री अभिषेक आनंद, निदेशक (मानव संसाधन), Hyatt Regency, Delhi
• सुश्री वीनू जयचंद, प्रिंसिपल पार्टनर, EY India
इन विशेषज्ञों ने चर्चा की कि कैसे कौशल पहलों को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए, शिक्षुता अवसर बढ़ाए जाएँ तथा भारतीय युवाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित की जाए।
सम्मेलन में यह विचार प्रमुख रहा कि कौशल कार्यक्रमों की सफलता सिर्फ संख्या में नहीं बल्कि वास्तविक आजीविका, सम्मानजनक नौकरियों और सशक्त सपनों में मापी जाए। उद्योगों को पाठ्यक्रम डिजाइन, प्रशिक्षुओं को अवसर देने और नवप्रवर्तन को अपनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया गया।
पीएम विकास योजना के अंतर्गत अब तक 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 41 परियोजनाएँ प्रारंभ हो चुकी हैं, जिनसे 1.34 लाख से अधिक युवाओं और कारीगरों को लाभ मिला है।


























