राष्ट्र निर्माण में स्वामी विवेकानंद के दर्शन की प्रासंगिकता विषय पर रामेश्वर महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा किशोरी सिन्हा सभागार में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.(डॉ.) श्यामल किशोर की अध्यक्षता में स्वामी विवेकानंद की जयंती और एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अध्यक्ष प्रो. आलोक प्रताप सिंह तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. सरोज कुमार वर्मा रहे ।
कार्यक्रम के संयोजक और सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. शारदानंद सहनी ने आगत अतिथियों और कार्यक्रम अध्यक्ष का स्वागत अभिनन्दन किया । डॉ. शारदा ने बताया कि स्वामी विवेकानंद की सीख को प्रत्येक युवा को अपनाना चाहिए ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) आलोक प्रताप सिंह ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनके सृजन पर प्रकाश डाला । प्रो. सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने 25 वर्ष की आयु में इस सांसारिक जीवन त्याग कर संन्यास ले लिया । उनका विश्व धर्म संसद का शिकागो भाषण विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ । स्वामी जी ने वेदांत और योग के सिद्धांतों का प्रचार करते हुए रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की । वे शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्रीय चेतना के प्रबल समर्थक थे ।
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता प्रो. (डॉ.) सरोज कुमार वर्मा ने अपने अभिभाषण में बताया कि स्वामी विवेकानंद का जीवन और सृजन दोनों अविस्मरणीय है । उनका त्याग और चेतना युवाओं को एक सीख देती है । उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए । उनके द्वारा कही गई यह पंक्ति सर्वाधिक उद्धृत की जाती है ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.(डॉ.) श्यामल किशोर ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में बताया कि स्वामी विवेकानंद भारत की चेतना और युवा अस्मिता के प्रतीक हैं । स्वामी विवेकानंद के इस विचार कि किताबें अनगिनत हैं और समय कम है। ज्ञान का रहस्य यह है कि जो ज़रूरी है उसे लें । उसे लें और उसके अनुसार जीने की कोशिश करें । प्रो. किशोर ने छात्र – छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा अधिक से अधिक पढ़ें और किताबें खरीदें । किताब खरीदने और पढ़ने की संस्कृति विकसित करनी होगी, यह सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है ।
धन्यवाद ज्ञापन दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो.(डॉ.) रजनी रंजन ने किया ।
इस अवसर पर भाषण प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार अर्थशास्त्र की आकांक्षा कुमारी, द्वितीय पुरस्कार इतिहास विभाग के छात्र साहिल रज़ा तथा तृतीय पुरस्कार हिंदी विभाग की स्वाती कुमारी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया ।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकों डॉ. शारदा नंद सहनी, डॉ. राजबली, डॉ. गोवर्धन, डॉ. संदीप कुमार सिंह, डॉ. वसीम रेजा, डॉ. उपेंद्र गामी,डॉ. स्मृति चौधरी,डॉ. महजबीन प्रवीन, डॉ.बादल कुमार, डॉ. मयंक मौसम, डॉ. सुमित्रा कुमारी, डॉ. अविनाश झा, डॉ. अविनाश कुमार, डॉ.सर्वेश्वर सहित कर्मचारियों में अभिशेष,किशन,समीर नीतेश्वर ठाकुर, अजीत तथा छात्रों में निशांत, अभिषेक,ओमानंद,तनवीर, गौतम, साहिल, करण,किशन, कोमल, सलोनी, श्रुति सुमन, साहिन सालू सहित भारी संख्या में छात्र – छात्राओं की उपस्थिति रही ।





























