Kaushlendra Pandey/नई दिल्ली — भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आए, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
मीटिंग में द्विपक्षीय संबंधों को अगले दशक की आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत करने पर जोर दिया गया।
दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष, परमाणु सहयोग और तकनीकी साझेदारी को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा।
भारत–रूस मैत्री दशकों से चली आ रही है और आज नई वैश्विक परिस्थितियों में और भी महत्वपूर्ण बन गई है।
बैठक में तेल–गैस आपूर्ति, वैकल्पिक भुगतान प्रणाली, व्यापार संतुलन और लॉजिस्टिक चेन पर भी चर्चा हुई।
भारत ने रूस के साथ राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, जिससे डॉलर निर्भरता कम हो सके।
रूस ने भारत में निवेश और संयुक्त औद्योगिक उत्पादन पर सहयोग बढ़ाने में रुचि दिखाई।
दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकजुट रुख अपनाते हुए वैश्विक शांति के लिए सामूहिक प्रयास की बात कही।
रक्षा उत्पादन, स्पेयर पार्ट्स सप्लाई और को-प्रोडक्शन प्रोजेक्ट्स को गति देने पर सहमति बनी।
शिक्षा, मेडिकल, कृषि, मत्स्य–पशुपालन व अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे नागरिक क्षेत्रों में भी विस्तार पर विचार हुआ।
भारत–रूस 2030 तक व्यापार को उल्लेखनीय स्तर तक बढ़ाने का लक्ष्य रख सकते हैं।
यूक्रेन संकट, इंडो–पैसिफिक क्षेत्र और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर भी खुलकर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने कहा कि मैत्री विश्वास पर आधारित है और भविष्य की पीढ़ी के लिए नए अवसर खोलेगी।
सांस्कृतिक और जनता से जनता के स्तर पर संपर्क बढ़ाने की रूपरेखा भी तय हुई।
दौरा इस बात का संकेत है कि भारत–रूस संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरते रहे हैं और आगे भी रहेंगे।





























