Kaushlendra Pandey/Government Tibbi College Hospital, पटना में बैच 2020 के प्रशिक्षु चिकित्सकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन आज मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर डॉ. शाहनवाज़ अख्तर के संरक्षण में अस्पताल के केंद्रीय कॉन्फ्रेंस हॉल में संपन्न हुआ। यह कार्यशाला 16 से 18 फरवरी 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य नवप्रवेशी चिकित्सकों को उनके पेशेवर दायित्वों, चिकित्सा नियमों, नैतिक मूल्यों और व्यावहारिक कौशल से परिचित कराना है।
उद्घाटन समारोह में डॉ. मोहम्मद तनवीर आलम, डॉ. मुजफ्फरुल इस्लाम, डॉ. मोहम्मद निजामुद्दीन, डॉ. मोहम्मद राज़ी अहमद, डॉ. मंसूर आलम, डॉ. जावेद अहमद, डॉ. अब्दुस्सलाम, डॉ. सदरुज़्ज़मां और डॉ. काइनात ज़हरा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ शिक्षक उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के पीजी स्कॉलर्स और इंटर्न्स की बड़ी संख्या भी मौजूद थी।
अपने संबोधन में मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल डिग्रियाँ प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे चिकित्सक तैयार करना है जो तकनीकी रूप से दक्ष और नैतिक रूप से सुदृढ़ हों। उन्होंने इंटर्न्स से इस प्रशिक्षण अवसर का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
उद्घाटन समारोह के तुरंत बाद वैज्ञानिक सत्र प्रारंभ हुआ। सर्वप्रथम डॉ. मोहम्मद तनवीर आलम ने इंटर्नशिप के नियम एवं विनियमों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए ड्यूटी प्रणाली, अनुशासन और पेशेवर जिम्मेदारियों की जानकारी दी। इसके पश्चात डॉ. मुजफ्फरुल इस्लाम ने “इलाज-बिल-तदबीर” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए इसकी व्यावहारिक उपयोगिता समझाई।
डॉ. अमरीश कुमार ने मांसपेशीय एवं अस्थि-संधि रोगों के उपचार में फिजियोथेरेपी की महत्ता पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. मोहम्मद राज़ी अहमद ने वाइटल्स की जांच एवं उनकी क्लिनिकल उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा की। सत्र के अंत में डॉ. नजीबुर्रहमान ने पैथोलॉजिकल जांचों और सटीक निदान में उनकी भूमिका को विस्तार से समझाया।
सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विषयों पर तर्कपूर्ण एवं व्यावहारिक व्याख्यान प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने गहरी रुचि के साथ सत्रों में भाग लिया तथा प्रश्नोत्तर के माध्यम से ज्ञानवर्धन किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रोग्राम आयोजक डॉ. सदरुज़्ज़मां एवं डॉ. काइनात ज़हरा के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में पीजी स्कॉलर डॉ. ग़ज़ाला शम्सी, डॉ. शिफा शाहिद, डॉ. मुशाहिद और डॉ. शबीना परवीन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही कार्यालय स्टाफ—शंकर कुमार, मंजरी जी, गोपाल, वसीम अहमद तथा अन्य कर्मचारियों का भी आयोजन को सफल बनाने में सराहनीय योगदान रहा।
कार्यशाला का पहला दिन शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण की दृष्टि से अत्यंत सफल रहा और इसे भविष्य के चिकित्सकों के गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।

























