कोलकाता। Mamata Banerjee ने होली की पूर्व संध्या पर राज्यवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सभी समुदाय, जाति, धर्म और वर्ग के लोगों को एकता और सौहार्द के साथ पर्व मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि होली रंग, सद्भाव और मानवता का उत्सव है, जो भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बिहारी, राजस्थानी, गुजराती और पंजाबी शैली की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया, जो देश की विविध परंपराओं की झलक प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि यह विविधता ही भारत की असली ताकत है और हमें इसे संजोकर रखना है।
जैन समुदाय की मांग का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसतंभ के उद्घाटन के दौरान जैन समाज के प्रतिनिधियों ने मंदिर निर्माण के लिए भूमि आवंटन का अनुरोध किया था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ट्रस्ट के गठन के बाद 5 एकड़ भूमि बिस्वा बंगला गेट के निकट रियायती दर पर उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जगन्नाथ धाम, दुर्गा आंगन, महाकाल मंदिर, गुरुद्वारा गेट और मस्जिदों के लिए भूमि उपलब्ध कराने जैसे कदमों से उनकी सरकार ने हर समुदाय को सम्मान और सुरक्षा देने का प्रयास किया है।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र को लेकर गहरी चिंता भी व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के कारण पश्चिम बंगाल के लगभग 1.2 करोड़ लोग अपने मताधिकार से वंचित होने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान 160 से अधिक लोगों की मौत की खबरें बेहद दुखद और चिंताजनक हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों से भारत में रह रहे नागरिकों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए मजबूर किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वैध मतदाता को वोट देने का संवैधानिक अधिकार है और इस अधिकार की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को लेकर वे लगातार Supreme Court of India और Election Commission of India के समक्ष लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखती रही हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 6 मार्च से वे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए धरना शुरू करेंगी और जनता से नैतिक समर्थन की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने जीवनभर जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और आगे भी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि होली के रंग हमें यह याद दिलाते हैं कि भारत की आत्मा बहुलतावादी, लोकतांत्रिक और अटूट है, जिसे हम शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से सुरक्षित रखेंगे।




























