विश्व भर में हिन्दी का ध्वज लहराएगा, शीघ्र ही यह राष्ट्रभाषा भी होगी : राम नाथ ठाकुर, साहित्य सम्मेलन में आहूत विश्व हिन्दी दिवस समारोह में ‘हिन्दी रत्न’ अलंकरण से विभूषित हुए २० मनीषी
पटना, १० जनवरी। भारत की आत्मा की भाषा है हिन्दी। इसका ध्वज एक दिन विश्व भर में लहराएगा । यह शीघ्र ही भारत की ‘राष्ट्रभाषा’ भी होगी। यह एक अत्यंत वैज्ञानिक और सरल भाषा है। पूरी दुनिया में यह तेज़ी से फैल रही है। भारत के प्रत्येक नागरिक को…
CIN /विश्व हिन्दी दिवस पर बीस हिन्दी-सेवियों का होगा सम्मान/बिहार के राज्यपाल करेंगे उद्घाटन, मेधावी छात्र भी होंगे पुरस्कृत
पटना ब्यूरो , ८ दिसम्बर। विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर आगामी १० जनवरी को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आहूत समारोह में, हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास में मूल्यवान सेवा देने वाले बीस मनीषियों और विदुषियों को ‘हिन्दी-रत्न’ अलंकरण से विभूषित…
मौरिशस भारत का आभारी, यह हमारा दूसरा घर : डा सरिता बुधु /पटना में हुआ नागरिक अभिनन्दन, दिया मौरिशस आने का आमंत्रण
पटना, ६ जनवरी। भारत ने मौरिशस के उत्थान में पिछले अनेक वर्षों से लगातार बड़ी सहायता की है। इसलिए मौरिशस भारत का आभारी है। हमारे पूर्वज लगभग १९० वर्ष पूर्व भारत से मज़दूर के रूप में मौरिशस गए थे। आज हम बिहारी और पूर्वांचल मूल के लोगों का ही मौरशस में शासन…
CIN /अपने समय के अत्यंत लोकप्रिय गीतकार थे सरयू सिंह सुंदर, नृत्य-ऋषि थे डा नगेंद्र प्रसाद ‘मोहिनी’/ जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ समारोह
पटना, ५ जनवरी। “अंधेरी निशा में नदी के किनारे, धधक कर किसी की चिता जल रही है” — “कपोलों पर सिसक कर सो गए हैं नयन के काजल/ आए तुम मगर परदेस से फिर आ गए बादल”— ” स्वदेश के पहरेदारों और हिमालय बड़ा करो/ या तिब्बत…
CIN /“पं सकल नारायण शर्मा एवं डा नरेश पाण्डेय चकोर की जयन्ती पर आयोजित हुआ कवि सम्मेलन “
पटना, २ जनवरी। खड़ी बोली हिन्दी के उन्नयन में महान योगदान देने वाली प्रथम पीढ़ी के सर्वाधिक आदरणीय साहित्यकारों में परिगणित होते हैं पं सकल नारायण शर्मा। उनकी विद्वता और हिन्दी-सेवा से उनकी पूरी पीढ़ी प्रभावित रही। सभापति के रूप में, सम्मेलन के चौथे…
CIN /साहित्य सम्मेलन में दोनों विभूतियों की जयंती पर आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना, २ जनवरी। खड़ी बोली हिन्दी के उन्नयन में महान योगदान देने वाली प्रथम पीढ़ी के सर्वाधिक आदरणीय साहित्यकारों में परिगणित होते हैं पं सकल नारायण शर्मा। उनकी विद्वता और हिन्दी-सेवा से उनकी पूरी पीढ़ी प्रभावित रही। सभापति के रूप में, सम्मेलन के चौथे…
बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल से मिले साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष, दी नववर्ष की शुभकामनाएँ, उच्च शिक्षा को स्वच्छ करने का किया आग्रह, भेंट की पुस्तकें
पटना, १ जनवरी। नववर्ष के प्रथम दिन बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ बुधवार की संध्या बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल डा आरिफ़ मोहम्मद खान से भेंट की तथा उन्हें नववर्ष की शुभकामनाएँ दी। डा सुलभ ने राज्यपाल से आग्रह किया कि प्रदेश में उच्च…
साहित्य सम्मेलन के पाँचवे सभापति थे पं चंद्र्शेखरधर मिश्र, भारत के प्रथम हृदयरोग विशेषज्ञ थे डा श्रीनिवास जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयजित हुआ समारोह, दोनों साहित्यिक विभूतियों को दी गई काव्यांजलि
पटना ब्यूरो , ३० दिसम्बर। अपने समय के महान साहित्यकार और आयुर्वेदाचार्य पं चंद्रशेखरधर मिश्र खड़ी-बोली हिन्दी के प्राण-प्रतिष्ठापकों में से एक थे। वे बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के पाँचवे सभापति थे। वहीं इंदिरा गाँधी हृदय रोग संस्थान,पटना के…
अंगिका’ को भाषा का रूप प्रदान किया परमानंद पाण्डेय ने, राजनीति में साहित्यिक हस्तक्षेप थे डा शंकर दयाल सिंह -दोनों साहित्यिक विभूतियों को साहित्य सम्मेलन ने दी काव्यांजलि
पटना, २७ दिसम्बर। अंगिका भाषा और साहित्य के उद्धारकों में महाकवि परमानंद पाण्डेय का स्थान श्रेष्ठतम है। अंगप्रदेश की इस बोली को पाण्डेय जी ने भाषा का रूप प्रदान किया। इन्हें अंगिका का दधीचि साहित्यकार माना जाता है। दूसरी ओर हिन्दी के यशस्वी साहित्यकार डा…
तरुणाई से ही हृदय में आग लिए जीते रहे रामवृक्ष बेनीपुरी /जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने श्रद्धा से किया स्मरण, डा मीना कुमारी परिहार की चार पुस्तकों का हुआ लोकार्पण
पटना, २३ दिसम्बर। तरुणाई से मृत्यु तक वे अपने सीने में, अग्नि का पोषण करते रहे। क्रांति और विद्रोह की एक ज्वाला उनके हृदय में सदा धधकती रही। उनके भीतर जल रही वही अग्नि उनकी लेखनी से ऐसे साहित्य का सृजन करती रही, जिसने न केवल स्वतंत्रता-आंदोलन के अमर…
CIN /साहित्य सम्मेलन में स्मृतिशेष कवयित्री डा सुभद्रा वीरेन्द्र के ग़ज़ल-संग्रह ‘हम सफ़र’ का हुआ लोकार्पण
पटना,१५ दिसम्बर। विदुषी कवयित्री सुभद्रा वीरेंद्र की प्रत्येक रचना में कोई न कोई स्वप्नदर्शी क्षण अवश्य लक्षित होता है। उनके शब्द और संवेदनाएँ पाठकों के हृदय को सहज ही द्रवित करती हैं। वो एक ऐसी तपस्विनी काव्य-साधिका थीं, जिन पर हिन्दी और भोजपुरी भाषाएँ…
CIN /द्वितीय स्मृति-पर्व पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ समारोह, दी गयी काव्यांजलि
पटना, ११ दिसम्बर। ‘कौमुदी महोत्सव’ और ‘महामूर्ख सम्मेलन’ जैसे सांस्कृतिक-उत्सवों के कारण पटना में दशाब्दियों तक सुधी नागरिकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहे स्मृतिशेष संस्कृति-कर्मी, पत्रकार, कवि और रंगकर्मी पं विश्वनाथ शुक्ल…