प्रियंका भारद्वाज/पटना, 21 जूलाई :प्रधानाचार्य प्रो० तपन कुमार शांडिल्य ने टी. पी. एस. कॉलेज, पटना में आयोजित एस. डी. एस-पेज एवं वेस्टर्न ब्लोटिंग पर दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि एस. डी. एस-पेज प्रोटीन को उनके आणविक भार के आधार पर अलग करने की एक विश्लेषणात्मक तकनीक है । इस तकनीक से प्रोटीनुरिया जैसे रोगों का पता किया जाता है ।
कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. विनय भूषण कुमार ने कहा कि एस. डी. एस-पेज का व्यापक रूप से इस्तेमाल जैव रसायन, फोरेंसिक, आनुवंशिकी, आणविक जीव विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी में किया जाता है । वेस्टर्न ब्लोटिंग तकनीक में एस. डी. एस-पेज द्वारा अलग किए प्रोटीन को एक झिल्ली में ट्रांसफर किया जाता है और विशिष्ट एंटीबॉडी से उनकी जांच की जाती है । वेस्टर्न ब्लोटिंग का उपयोग कैंसर में प्रोटीन अभिव्यक्ति का अध्ययन करने और बायोमार्कर की पहचान करने के लिए किया जाता है ।
प्रॉक्टर प्रोफेसर अबू बकर रिजवी ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं छात्रों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने और उनके शोध कौशल को बढ़ाने में मदद करती हैं।
शिक्षकों में डॉ. ज्योत्सना कुमारी ने कहा कि इस कार्यशाला से छात्रों को प्रोटीन विश्लेषण की महत्वपूर्ण तकनीकों के बारे में जानने का अवसर मिला । डॉ. सानंदा सिन्हा ने कहा कि वेस्टर्न ब्लोटिंग जैविक अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण उपकरण है । डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. सुशोभन पलाधि, और डॉ. सुनीता कुमारी ने भी अपने विचार साझा किए ।
प्रतिभागियों में वर्षा कुमारी, चांदनी कुमारी, सादिया, अंजली रंजन आदि शामिल थे.प्रो. अबू बकर रिज़वी(मीडिया प्रभारी)टी.पी.एस. कॉलेज, पटना


























