रिपोर्ट:कशिश सिंह/नई दिल्ली मुख्य ब्यूरो। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) के अधीन कार्यरत Indian Institute of Corporate Affairs (IICA) ने पोस्ट ग्रेजुएट इनसॉल्वेंसी प्रोग्राम के 7वें बैच की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर देश के कई नामचीन कानूनी विशेषज्ञ (Legal Luminaries) भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान IICA के महानिदेशक ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) ने केवल एनपीए में कमी लाने का कार्य नहीं किया है, बल्कि भारत की क्रेडिट संस्कृति को भी पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने इसे आर्थिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
कॉर्पोरेट मामलों के सचिव और IICA के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी IBC की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इस कानून ने ऋणदाताओं और उधारकर्ताओं के बीच जवाबदेही की भावना को मजबूत किया है और निवेशकों में विश्वास को बढ़ाया है।
IICA का यह कार्यक्रम देश के पेशेवरों को दिवाला और पुनर्गठन की जटिलताओं को समझने और समाधान निकालने के लिए प्रशिक्षित करने का उद्देश्य रखता है, जो भारत के कॉर्पोरेट क्षेत्र को और अधिक मजबूत एवं उत्तरदायी बनाएगा।
























