पटना, 30 अगस्त 2025/जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता डाॅ0 निहोरा प्रसाद यादव एवं छात्र जद (यू) के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कृष्णा पटेल ने संयुक्त रुप से प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संकल्प, दृष्टि और कार्यक्षमता से दिखा दिया कि बिहार केवल वादों से नहीं, बल्कि जमीन पर किए गए कामों से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा और खेल दोनों का संगम स्थापित कर युवाओं को नया मंच दिया है।
29 अगस्त को राजगीर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम और खेल विश्वविद्यालय से हीरो एशिया कप का भव्य शुभारंभ इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि बिहार में पहली बार ऐसा टूर्नामेंट हो रहा है। सवाल यह है कि इतने सालों तक सत्ता में बैठे नेताओं ने आखिर क्यों बिहार के युवाओं को इस मौके से वंचित रखा? इस टूर्नामेंट में भारत समेत जापान, चीन, कोरिया, मलेशिया, बांग्लादेश और अन्य देशों के खिलाड़ी यहाँ पर हाॅकी में अपने कौशल का परचम लहरा रहे हैं। राजगीर की धरती पर करीब 740 करोड़ की लागत से बना 90 एकड़ का खेल परिसर आज बिहार का गौरव है। यहाँ केवल खेल ही नहीं होंगे, बल्कि खिलाड़ी शिक्षा और रिसर्च में भी भविष्य बनाएंगे।
विपक्ष की सरकारों के दौर की हकीकत बिहार के लोग नहीं भूले हैं। 2005 से पहले खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और सुविधाओं के लिए दिल्ली और पटियाला जाना पड़ता था। कई खिलाड़ी रोजी-रोटी के चक्कर में रिक्शा चलाने को मजबूर हो गए थे। जबकि उस दौर में सत्ता में बैठे नेता अपने बच्चों को झारखंड भेजकर खेल का भविष्य बनवा रहे थे। इतना ही नहीं, विपक्ष के राज में पैरवी और सिफारिश से पुरस्कार बांटे जाते थे। साल 2003 इसका बड़ा उदाहरण है, जब बिना योग्यता के तेजस्वी यादव को खेल सम्मान दिला दिया गया। यही थी उस दौर की सच्चाई।
आज तस्वीर बिल्कुल बदल चुकी है। अब पैरवी नहीं, प्रतिभा बोलती है। अब मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को केवल सम्मान ही नहीं, बल्कि सीधे सरकारी नौकरी भी मिल रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि , खेलेगा बिहार तभी बढ़ेगा बिहार और यही वजह है कि आज बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 36 से अधिक मेडल जीत चुके हैं।
दरअसल, विपक्ष की राजनीति केवल वादों और झूठे दावों तक सीमित रही। लेकिन नीतीश कुमार जी ने अपने संकल्प से दिखा दिया कि बिहार को खेल और शिक्षा दोनों का हब बनाया जा सकता है। आज जब बिहार के मैदानों से अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की गूंज उठ रही है, तब विपक्ष को आईना देख लेना चाहिए कि उनके अंधकारकाल में खिलाड़ियों की हालत क्या थी और आज क्या है।




























