Kaushlendra Pandey:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के तियानजिन से ट्वीट करते हुए कहा – “Interactions in Tianjin continue! Exchanging perspectives with President Putin and President Xi during the SCO Summit.” यानी तियानजिन में वार्ताएं जारी हैं और SCO शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तथा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
इस मुलाकात ने वैश्विक कूटनीतिक मंच पर बड़ा संदेश दिया है। एक ही फ्रेम में भारत, चीन और रूस के शीर्ष नेता दिखे। यह तस्वीर न केवल एशियाई महाशक्तियों की ताक़त को दर्शाती है बल्कि अमेरिका और पश्चिमी देशों को यह स्पष्ट संकेत भी देती है कि वैश्विक समीकरण बदल रहे हैं।
मोदी-पुतिन-शी की त्रिपक्षीय बातचीत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि दुनिया इस समय यूक्रेन संकट, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती तनातनी और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। भारत ने यहां अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का प्रदर्शन किया – पश्चिम के दबाव से अलग रहकर रूस और चीन दोनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बातचीत की।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुलाकात भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का उदाहरण है और अमेरिका के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि भारत किसी एक ध्रुव पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का नेतृत्व करेगा।
कंट्री इनसाइड न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, तियानजिन में हुई यह तिकड़ी मुलाकात आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।



























