नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय के अधीन वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने ऋण वसूली अधिकरणों (DRTs) के पीठासीन अधिकारियों के लिए दो दिवसीय आवासीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। यह संगोष्ठी न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से आयोजित की गई।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और अधिकारियों ने ऋण वसूली और शोधन अक्षमता अधिनियम, 1993 (RDB Act) के निर्माण, प्रावधानों और व्यवहारिक लागूकरण पर विस्तृत चर्चा की। साथ ही RDB के क्षेत्राधिकार, DRT के सामने कार्यवाही की भूमिका, केस प्रबंधन प्रणाली, लंबित मामलों में तेजी लाने के उपाय, तथा DRT की दक्षता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रक्रियाओं पर विचार-विमर्श हुआ।
संगोष्ठी का उद्देश्य न्यायाधिकरणों की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाना, ऋण वसूली व्यवस्था में सुधार लाना और वित्तीय तंत्र की स्थिरता को सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम का आयोजन वित्त मंत्रालय, भारत सरकार की पहल पर किया गया।
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