केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अंतरक्षेत्रीय समन्वय के माध्यम से इन्फ्लूएंजा से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से दो दिवसीय “चिंतन शिविर” का आयोजन किया। इस शिविर का मकसद देश में आगामी इन्फ्लूएंजा के मौसम से पहले तैयारी और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ करना है।
चिंतन शिविर में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रमुख हितधारकों—केंद्र व राज्य सरकारों, तकनीकी संस्थानों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अन्य संबंधित विभागों—के बीच विचार-विमर्श के लिए एक संरचित मंच उपलब्ध कराया गया। इसमें निगरानी, समय पर पहचान, उपचार प्रोटोकॉल, अस्पतालों की तैयारियां, दवा एवं वैक्सीन उपलब्धता, जोखिम संचार और अंतर-मंत्रालयी समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
मंत्रालय ने बताया कि इन्फ्लूएंजा से संक्रमित होने पर आमतौर पर बुखार, खांसी, शरीर दर्द, सिरदर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके प्रभाव हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं, विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार व्यक्तियों में जोखिम अधिक रहता है।
शिविर के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि पूर्व-तैयारी, समन्वित कार्रवाई और डेटा-आधारित निर्णय से इन्फ्लूएंजा के प्रकोप को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही राज्यों के साथ तालमेल बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर क्षमताओं को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी सहमति बनी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की कि वे मौसमी फ्लू के लक्षण दिखने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लें और स्वच्छता व रोकथाम संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करें।
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