पटना। बिहार में नवसृजित 208 स्नातक स्तरीय (डिग्री) महाविद्यालयों में दर्शनशास्त्र विषय में पद-सृजन एवं नियुक्ति की मांग को लेकर अखिल भारतीय दर्शन परिषद एवं दर्शन परिषद, बिहार के बैनर तले शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों द्वारा व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में माननीय मुख्यमंत्री, राज्यपाल, उच्च शिक्षा मंत्री, शिक्षा विभाग, राजभवन सचिवालय सहित विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों को ज्ञापन सौंपा गया। साथ ही पटना विश्वविद्यालय सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों द्वारा मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल महोदय को पोस्टकार्ड लिखकर दर्शनशास्त्र विषय को नवसृजित महाविद्यालयों में शामिल करने की अपील की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नई शिक्षा नीति–2020, भारतीय ज्ञान परंपरा, IKS एवं मूल्यपरक शिक्षा के इस दौर में दर्शनशास्त्र जैसे मूलभूत विषय की उपेक्षा बिहार की गौरवशाली बौद्धिक विरासत के विपरीत है।
इस अवसर पर महासचिव बिहार दर्शन परिषद प्रोफेसर डॉ. श्यामल किशोर, महासचिव अखिल भारतीय दर्शन परिषद प्रोफेसर डॉ. किस्मत कुमार सिंह, प्रोफेसर पूनम सिंह, प्रोफेसर वीणा अमृत, डॉ. शिवी सिन्हा, डॉ विकास कुमार, डॉ. राजन सहित अनेक शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि “दर्शन बचेगा, तभी भारतीय ज्ञान परंपरा बचेगी और भारत विश्वगुरु बनेगा।”





























