आचार्य रामलोचन शरण की ‘मनोहर पोथी’ पढ़कर बिहार ने हिन्दी सीखी, 94वर्ष की आयु में भी साहित्य की सेवा में सक्रियता से रत हैं डा शिववंश पाण्डेय- साहित्य सम्मेलन में जन्मोत्सव पर सम्मानित हुए डा पाण्डेय
पटना, 9 फरबरी। हिन्दी भाषा और साहित्य के उन्नयन में अप्रतिम अवदान देनेवाले मनीषी विद्वान, प्रकाशक और संपादक आचार्य रामलोचन शरण ‘बिहारी’ की ‘मनोहर पोथी’ पढ़कर बिहार सहित समस्त पूर्वांचन ने हिन्दी सीखी। बाल-साहित्य की उनकी शताधिक…
कला,संगीत और साहित्य के अनन्य पोषक और आदर्श राजनेता थे डा पूर्णेंदु ,साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ स्मृति-पर्व
पटना, ६ फरवरी। अपने समय के अत्यंत लोकप्रिय संस्कृति-पुरुष और राजनेता थे डा पूर्णेंदु नारायण सिन्हा। जब तक जीवित रहे बिहार की सांस्कृतिक-धड़कन बने रहे। कला, संगीत और साहित्य के अनन्य पोषक पूर्णेंदु बाबू एक आदर्श राजनेता और अनुरागी साहित्य-सेवी थे। उनका…
कला,संगीत और साहित्य के अनन्य पोषक और आदर्श राजनेता थे डा पूर्णेंदु,साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ स्मृति-पर्व, आयोजित हुई लघुकथा-गोष्ठी
पटना, ६ फरवरी। अपने समय के अत्यंत लोकप्रिय संस्कृति-पुरुष और राजनेता थे डा पूर्णेंदु नारायण सिन्हा। जब तक जीवित रहे बिहार की सांस्कृतिक-धड़कन बने रहे। कला, संगीत और साहित्य के अनन्य पोषक पूर्णेंदु बाबू एक आदर्श राजनेता और अनुरागी साहित्य-सेवी थे। उनका…
हिन्दी काव्य-साहित्य के गौरव स्तम्भ हैं आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री,साहित्य सम्मेलन में मनायी गयी जयंती, मथुरा प्रसाद दीक्षित और पं शिवदत्त मिश्र भी किए गए स्मरण
पटना, ४ फरवरी। गीत के शलाका-पुरुष आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री बिहार के ही नहीं, अपितु हिन्दी काव्य-साहित्य के गौरव-स्तम्भ हैं। एक ऐसा प्रकाश-स्तम्भ जो पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करता है। वे संस्कृत और हिन्दी के वरेण्य साहित्यकार तो थे ही संगीत के भी बड़े…
कलाकक्ष के ४७वें स्थापना दिवस समारोह में सम्मानित हुईं अनेक साहित्यिक-सांस्कृतिक विभूतियाँ , हुई रंगारंग भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लगायी गई चित्र-प्रदर्शनी
पटना, ३१ जनवरी। साहित्य तथा भारतीय कलाओं के संरक्षण, प्रशिक्षण और मंचन के लक्ष्य से महाकवि काशीनाथ पाण्डेय द्वारा स्थापित संस्था ‘कलाकक्ष’ का ४७वाँ स्थापना दिवस समारोह, शुक्रवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मनाया गया। साहित्य सम्मेलन…
काव्य पाठ के साथ सामयिक परिवेश ने मनाया 19 वाँ स्थापना दिवस समारोह
सूबे की चर्चित साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था सामयिक परिवेश ने अपना 19वाँ स्थापना दिवस समारोह आज मनाया।समारोह का उद्घाटन बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ,वरिष्ठ साहित्यकार और लिटेरा पब्लिक स्कूल समूह की निदेशिका ममता मेहरोत्रा और…
साहित्य सारथी बलभद्र कल्याण एवं प्रफुल्लचंद्र ओझा ‘मुक्त’ की मनायी जयंती,साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई राष्ट्रीय गीत-गोष्ठी, दी गयी काव्यांजलि
पटना, २७ जनवरी। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ की अध्यक्षता में रविवार को बिहार की दो साहित्यिक विभूतियों बलभद्र कल्याण एवं प्रफुल्लचंद्र ओझा ‘मुक्त’ की जयंती काव्य-रस के साथ मनायी गयी। दोनों विभूतियों की विनम्र…
असाधारण प्रतिभा के मनीषी विद्वान थे पं राम नारायण शास्त्री : पूर्व राज्यपाल/ स्मृति-पर्व पर सुप्रसिद्ध चिंतक देवव्रत प्रसाद और पत्रकार हृदय नारायण झा को दिया गया स्मृति सम्मान
पटना, २४ जनवरी। असाधारण प्रतिभा के मनीषी विद्वान थे पं राम नारायण शास्त्री । वे एक महान हिन्दी सेवी ही नहीं, संस्कृत के महापंडित और प्राच्य साहित्य के महान अन्वेषक भी थे। वे साहित्य, समाज और राजनीति में भी अपना विशिष्ट स्थान रखते थे। उनकी सरलता और…
युग-चेतना के एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण कवि थे पं जनार्दन प्रसाद झा ‘द्विज’ / हिदी साहित्य सम्मेलन में जयंती पर आयोजित हुई गीत-गोष्ठी
पटना, २२ जनवरी। ‘भावुक कवि’ के रूप में चर्चित और सम्मानित रहे पं जनर्दन प्रसाद झा ‘द्विज’ छायावाद-काल के एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण कवि और मूल्यवान कथाकार थे। इनकी रचनाओं में युग-चेतना प्रखरता के साथ लक्षित होती है। महाकवि जयशंकर…
एक महान नाटककार ही नहीं दार्शनिक-चिंतक भी थे डा चतुर्भुज -जयंती पर डा अशोक प्रियदर्शी की पुस्तक ‘अतीत के वातायन से’ का हुआ लोकार्पण, हुई लघुकथा-गोष्ठी
पटना, १५ जनवरी। एक महान नाटककार ही नहीं, काव्य-कल्पनाओं से समृद्ध एक महान दार्शनिक चिंतक भी थे डा चतुर्भुज । उनका जीवन और नाटक पर्यायवाची शब्द की तरह अभिन्न थे। बालपन से मृत्य-पर्यन्त वे इससे कभी पृथक नहीं हो सके। हिन्दी-नाटक को नया रूप और बल देने में…
घाटियों में बहती हुई नदी सा जीवन था कवि विशुद्धानंद का / जयंती पर चित्रकार-कवि सिद्धेश्वर को दिया गया ‘विशुद्धानंद स्मृति-सम्मान’, आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना, १४ जनवरी। ‘एक नदी मेरा जीवन’ का कवि पं विशुद्धानंद का संपूर्ण जीवन पर्वत की घाटियों से होकर अनेक वन-प्रांतों और पत्थरीली भूमि में बहती नदी सा ही था। उनके दर्द भरे गीतों में उनकी जीवनानुभूति, संघर्ष और जिजीविषा को अभिव्यक्ति मिली है। वे…
समाज के लिए काम करने वाले लोग ही याद किए जाते हैं : नंद किशोर यादव
पटना, ११ जनवरी। देश और समाज के लिए कार्य करने वाले लोग सदा जीवित रहते हैं। मनुष्य अपनी कीर्ति में जीवित रहता है। ऐसे ही लोग याद किए जाते हैं और ऐसे ही लोगों और संस्थाओं से समाज का निर्माण होता है।यह बातें शनिवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में…