Kaushlendra Pandey चाईबासा (झारखंड), 27 जुलाई।भारत की आंतरिक सुरक्षा के मजबूत प्रहरी, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने आज अपने 87वें स्थापना दिवस के अवसर पर वीरता, अनुशासन और सेवा की परंपरा का भव्य उत्सव मनाया। इस अवसर पर चाईबासा में आयोजित समारोह की अगुवाई उप महानिरीक्षक श्री सुनील कुमार ने की।
इस गौरवपूर्ण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बल के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई, जिनकी वीरता और बलिदान देश की शांति और अखंडता के लिए प्रेरणा स्रोत है। दो मिनट का मौन रखकर उन्हें याद किया गया।
🔹 इतिहास और विरासत
सीआरपीएफ की स्थापना 27 जुलाई, 1939 को क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद 28 दिसंबर 1949 को इसे संसद अधिनियम के माध्यम से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का नाम मिला। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस बल की बहुआयामी भूमिका का सपना देखा था, जो आज भी भारत की सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है।
🔹 मुख्य कार्य और जिम्मेदारियां
कानून-व्यवस्था बनाए रखना, दंगा-प्रदर्शन नियंत्रण
आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियान, विशेषकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में
वीआईपी सुरक्षा, चुनाव ड्यूटी और इंफ्रास्ट्रक्चर की रक्षा
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण सरंक्षण जैसे विविध कार्यों में सक्रिय योगदान
🔹 विशेष इकाइयां
सीआरपीएफ में दंगा नियंत्रण, आतंकवाद विरोध, महिला इकाइयां और शहरी युद्ध अभियानों के लिए कई विशेष इकाइयाँ मौजूद हैं, जो बल की बहुआयामी क्षमताओं को दर्शाती हैं।
🔹 उप महानिरीक्षक का संदेश
श्री सुनील कुमार ने इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों एवं जवानों को संबोधित करते हुए कहा, “हम सबको राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपने व्यक्तिगत आराम को त्याग कर हर चुनौती से निपटने के लिए सदैव तत्पर रहना है। बल की गौरवशाली परंपरा हम सभी के लिए प्रेरणा है।”
कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक (परिचालन), श्री अमित रंजन झा, उप कमांडेंट समेत बड़ी संख्या में अधिकारी और जवान उपस्थित रहे।
इस अवसर ने ना केवल बल की उपलब्धियों को याद किया, बल्कि राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण की भावना को और भी प्रगाढ़ किया।
रिपोर्ट: कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी




























