सौरभ निगम/मुजफ्फरपुर/रामेश्वर कॉलेज में बुधवार को वाणिज्य संकाय के छात्रों का दीक्षारंभ समारोह का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो.तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि शिक्षा का दूसरा उद्देश्य रोजगार पाना है। लेकिन शिक्षा का पहला उद्देश्य ज्ञान की प्राप्ति करना है। इसी माध्यम से व्यक्ति का विकास होगा।
उन्होंने छात्रों से कहा रास्ते में बहुत संघर्ष है। अगर संघर्ष नहीं होगा तो जीवन का महत्व नहीं है। संघर्ष होगा तभी विकास होगा। सफलता के लिए प्रयास करते रहना चाहिए। आप किसी भी विषय के हों पर साहित्य से जुड़े रहें। छोटी लकिड़ के सामने बड़ी लकिड़ खींचिये। आपके पास शक्ति है उर्जा है, प्रतिभा है उसे निखारने की जरूरत है। संस्थान आपको मानवता से परिचित कराता है। उन्होंने कहा कि जोश और होश में बैलेंस बनाकर रखना होगा। जो इन दोनों में सामंजस्य बनाकर आगे बढ़ाता है उसे सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने हरिवंश राय बच्चन, रामधारी सिंह दिनकर, जयशंकर प्रसाद और तुलसीदास की कविताओं से छात्रों को प्रेरित किया। उन्होंने माउण्ट मैन दशरथ मांझी की मेहनत का उदाहरण देकर छात्रों में उत्साह भरा। पूर्व कुलपति ने नई शिक्षा नीति के बारे बनाता। कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाना है। इसी उद्देश्य से नई शिक्षा नीति लागू किया गया है। युवाओं पर इसमें सबसे अधिक जोड़ दिया गया है, क्योंकि विश्व में भारत सबसे युवा वाला देश है। यहां 65 फीसदी युवा हैं। उनके कंधे पर यह निर्भर है। नई शिक्षा नीति में समावेश और समानता की बात है। तकनीक और विज्ञान को बढ़ावा दिया गया है। इसमें इनोवेशन और स्टार्टअप को तरजीह दी गई है। उन्होंने कहा देश के लिए कुछ चुनौतियां भी है। जनसंख्या का प्रबंधन बहुत जरूरी है। देश या राज्य के विकास के लिए कुशल शासन जरूरी है। अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर ने छात्रों से कहा आप जिले के सबसे समृद्ध महाविद्यालय के सदस्य बने हैं। ज्ञान और धर्म दो ऐसे तत्व है जिसके कारण भारत की विशिष्ट पहचान बनी है। भारत में ज्ञान का अर्थ है सैद्धांतिक ज्ञान, व्यवहारिक ज्ञान और आत्मिक ज्ञान है और धर्म का अर्थ आपके कर्तव्य से है। भारत की विशेषता रही है कि यह कर्तव्य परायण का देश रहा है। एक विद्यार्थी को समर्पण भाव से लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पढ़ाई करना है। छात्रों को समूह में जीना सीखना चाहिए। आपके दो पिता होते हैं एक ने जन्म दिया। दूसरे शिक्षक होते हैं। जो आपको जीना सीखते हैं। आप यदि सफल होते हैं तो दो लोग जरूर खुश होते है। एक माता-पिता और दूसरे गुरु। इसे ध्यान में रखते हुए नौकरी प्राप्त करें और एक अच्छा नागरिक भी बन जाये। जिस संस्था में अपने प्रवेश किया है उसने आपको एक पहचान दी है तो आपका भी नैतिक दायित्व बनता है कि संस्था में रहते हुए ऐसा काम करें जिससे आपके साथ संस्था की भी पहचान बने। कार्यक्रम में स्वागत भाषण कॉमर्स विभागाध्यक्ष डॉ.मैहजबीन परवीन ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो.ब्रह्मचारी व्यास नंदन शास्त्री ने किया। प्रो.रजनी रंजन, डॉ. शारदा नंद सहनी ने भी विचार रखें। मंच संचालन छात्रा दृष्टि सरार्फ व राधिका ने किया। मौके पर डॉ.स्मृति चौधरी, डॉ. पीएन शर्मा, डॉ.सुमित्रा कुमारी, डॉ.बादल कुमार, डॉ.वसीम रेजा, डॉ. धीरज कुमार, डॉ.उपेंद्र प्रसाद, डॉ.अभिनय कुमार, डॉ.चिन्मय प्रकाश, डॉ. राजबली राज, डॉ. अविनाश कुमार झा, डॉ.अविनाश कुमार, डॉ.मयंक मौसम, डॉ.रीता कुमारी, कुंदन, रिंकी टेबरीवाल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे।





























