लखनऊ समाचार ब्यूरो/सौरभ निगम।राजधानी लखनऊ के चिनहट क्षेत्र स्थित नौबस्ता कला का राजकीय पशु औषधालय लंबे समय से बंद पड़ा है। औषधालय पर ताला लटकने के कारण यहां पशु चिकित्सक और अन्य स्टाफ की मौजूदगी नहीं रहती। नतीजतन आसपास के ग्रामीणों और पशुपालकों को अपने पशुओं का इलाज और टीकाकरण कराने के लिए निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ता है, जहां उन्हें महंगे दामों पर इलाज करवाना पड़ता है।
ग्राउंड जीरो की हकीकत
कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी की टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची और ग्रामीणों से बात की, तो ग्रामीणों ने साफ कहा कि “डॉक्टर साहब न तो अस्पताल में मिलते हैं और न ही गांव में आते हैं।” बरसात के इस मौसम में पशुओं में तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं और टीकाकरण की सख्त जरूरत है, मगर सरकारी अस्पताल बंद होने के कारण उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा।
सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में फर्क
एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पशुपालन व दुग्ध मंत्री धर्मपाल सिंह लगातार दावा करते हैं कि “ग्रामीण पशुपालकों के हितों की रक्षा होगी, उन्हें समय पर टीकाकरण और दवाइयों की सुविधा मिलेगी।” लेकिन नौबस्ता कला का यह पशु अस्पताल उन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर साहब हमेशा बहाना बनाते हैं कि “ड्यूटी कहीं और लगी है या टीकाकरण में व्यस्त हैं।” जबकि सच्चाई यह है कि अस्पताल पर ताला लटकता रहता है और वेतन नियमित रूप से लिया जा रहा है।
ग्रामीणों की मांग
पशुपालकों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे लापरवाह अधिकारियों और डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और गांव में सरकारी पशु औषधालय को तुरंत चालू कराया जाए, ताकि पशुओं को समय पर इलाज और टीकाकरण मिल सके।





























