स्नेहा सिंह/पश्चिम बंगाल की एक जनसभा में भाषण के दौरान राज्य सरकार और तृণमूल नेतृत्व ने बीजेपी पर तीखा हमला किया। वक्तव्य में कहा गया कि बंगाल विविध भाषा, संस्कृति और परिधान के बीच एकता का प्रतीक है और इसी “बहुरंगी पहचान” को बीजेपी कमजोर करना चाहती है।
नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र की बीजेपी सरकार की साज़िश के कारण बंगाल के लोगों को 100 दिन के काम की मजदूरी और आवास योजना की राशि से वंचित किया गया है। इसके बावजूद राज्य में 95 से अधिक जनकल्याण योजनाएं चलाकर विकास जारी है, जिनमें कई परियोजनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।
भाषण में कहा गया कि विभाजनकारी राजनीति, भाषाई भेदभाव और बंगाल के प्रवासी मजदूरों के साथ अन्य राज्यों में हो रही प्रताड़ना बीजेपी का असली चेहरा उजागर करती है।
कथित “SIR” कार्रवाई और राजनीतिक दबाव के चलते लोगों में दहशत फैलने तथा आत्महत्या जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया।
नेता ने मालदा के गाजोल में बड़ी संख्या में जनता की मौजूदगी को उदाहरण देते हुए कहा कि बंगाल अन्याय और अधिकार ख़त्म करने के प्रयासों को कभी स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने याद दिलाया कि बंगाल स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र रहा है — रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष बोस, विद्यासागर, विवेकानंद, क्षुदिराम, बिरसा मुंडा जैसे महानायक बंगाल की विरासत हैं।
सभा में संदेश दिया गया कि बंगाल धर्म-संस्कृति की समन्वय भूमि है और उसे “विभाजन व घृणा” की राजनीति से बचाना सभी का कर्तव्य है।
समापन में जनता से लोकतांत्रिक तरीके से आगामी चुनाव में “बंगाल-विरोधी व लोकतंत्र-विरोधी राजनीति को जवाब देने” की अपील की गई।
सभा का अंत “जय बंगला!” के नारे के साथ हुआ।

























