Kaushlendra Pandey /विश्व की प्राचीनतम आध्यात्मिक कृतियों में शुमार श्रीमद्भगवद् गीता केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को मार्गदर्शन और प्रेरणा देने वाली ग्रंथ मानी जाती है। इसी सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक संदेश को साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गीता की रूसी अनुवादित प्रति स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की। यह पल भारत-रूस मित्रता के ऐतिहासिक रिश्तों को एक नई सांस्कृतिक गहराई प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि गीता की शिक्षाएँ जीवन में कर्तव्य, धर्म और निष्काम भाव की प्रेरणा देती हैं और दुनिया भर में करोड़ों लोगों को सही मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करती हैं। उनके इस भाव को ट्वीट के माध्यम से साझा किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री ने लिखा—
“Presented a copy of the Gita in Russian to President Putin. The teachings of the Gita give inspiration to millions across the world.”
पुतिन और मोदी की मुलाकात भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के मद्देनज़र आयोजित की गई, जहाँ सामरिक, आर्थिक, रक्षा और ऊर्जा सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। लेकिन गीता की प्रति भेंट करना दोनों देशों के रिश्तों में आध्यात्मिक व सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है। यह केवल एक पुस्तक नहीं बल्कि भारतीय दर्शन, शांति और वैचारिक विरासत का संदेश है, जो विदेश नीति में ‘सॉफ्ट पावर’ की भूमिका को मजबूती से दर्शाता है।
भारतीय कूटनीति के इतिहास में ऐसे क्षण हमेशा विशेष रहे हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत न केवल राजनीतिक व आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को भी विश्व मंच पर साझा कर रहा है।




























