Kaushlendra Pandey/नई दिल्ली/पटना/केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले बिहार ने केंद्र सरकार के सामने अपनी पुरानी लेकिन बेहद जरूरी मांगों को एकजुट और मजबूती से रखा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई प्री-बजट बैठक में बिहार के वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने साफ कहा कि अब बिहार को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वित्तीय न्याय और विकास का ठोस अवसर चाहिए। इस दौरान बिहार के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर भी मौजूद रहे।
बिहार सरकार ने केंद्र को सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन में चार प्रमुख मांगों को सामने रखा, जिनका सीधा संबंध राज्य की अर्थव्यवस्था, आपदा-प्रबंधन, रोजगार और बुनियादी ढांचे से है। राज्य ने सबसे पहले उपकर और सेस को लेकर सवाल उठाया। बिहार का कहना है कि केंद्र के कुल कर संग्रह में उपकर-सेस की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन यह राशि राज्यों के साथ साझा नहीं की जाती। इससे बिहार जैसे कम आय वाले राज्यों को हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। राज्य की मांग है कि उपकर-सेस को विभाज्य पूल में शामिल किया जाए, ताकि बिहार को उसका संवैधानिक हक मिल सके।
इसके साथ ही बिहार ने मौजूदा 3% GSDP कर्ज सीमा को अपर्याप्त बताते हुए इसमें अतिरिक्त 2% की छूट देने की मांग की। राज्य का तर्क है कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम है और सीमित कर्ज सीमा के कारण बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाते। यदि कर्ज की सीमा बढ़ाई जाती है तो सड़क, पुल, अस्पताल और शिक्षा से जुड़े कार्य तेजी से पूरे होंगे, जिससे रोजगार बढ़ेगा और पलायन रुकेगा।
उत्तर बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ को राज्य ने गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट बताते हुए केंद्र से विशेष बाढ़ पैकेज की भी मांग की है। कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियों से होने वाली तबाही का जिक्र करते हुए बिहार ने आधुनिक तकनीक आधारित समाधान—सैटेलाइट अलर्ट, GIS मैपिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और नदी जोड़ो परियोजना—को प्राथमिकता देने की अपील की। राज्य का मानना है कि इससे फसलें बचेंगी, किसान सुरक्षित होंगे और बाढ़ के पानी का उपयोग सूखे इलाकों में सिंचाई के लिए किया जा सकेगा।
रोजगार सृजन को लेकर बिहार ने केंद्र से AI, ड्रोन, ब्लॉकचेन और स्मार्ट एग्रीकल्चर आधारित योजनाओं में विशेष सहयोग की मांग की है। राज्य का कहना है कि बिहार में पानी, उपजाऊ जमीन और श्रम संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, ऐसे में यदि उद्योगों को प्रोत्साहन मिले तो युवाओं को अपने राज्य में ही रोजगार मिल सकता है।
वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने उम्मीद जताई कि फरवरी 2026 के केंद्रीय बजट में बिहार की इन न्यायसंगत मांगों पर सकारात्मक फैसला लिया जाएगा। राज्य का मानना है कि अगर केंद्र ने इन मांगों को स्वीकार किया, तो यह बजट बिहार के लिए विकास का टर्निंग पॉइंट साबित होगा। अब सबकी निगाहें 1 फरवरी 2026 पर टिकी हैं—क्या इस बार बिहार को मिलेगा उसका हक, या फिर उम्मीदें एक बार फिर अधूरी रह जाएंगी?




























