अमित राय/कोलकाता।बंगाल की शांति, सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ जादवपुर 8बी बस स्टैंड से हाजरा मोड़ तक एक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। इस महाविरोध रैली में हजारों की संख्या में आम लोगों की स्वतःस्फूर्त भागीदारी देखने को मिली। मार्च का मुख्य उद्देश्य भाजपा पर अमानवीय, अलोकतांत्रिक और तानाशाही रवैये का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ जनआक्रोश को सड़क पर उतारना था।
रैली को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने तीखे शब्दों में भाजपा पर हमला बोला। कहा गया कि भाजपा की नीतियां न केवल बंगाल की शांति-सम्प्रीति को नुकसान पहुँचा रही हैं, बल्कि आम नागरिकों के मौलिक मतदान अधिकारों को भी कमजोर कर रही हैं। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार में डूबी भाजपा दूसरों को नैतिकता और ईमानदारी का पाठ पढ़ाने का दुस्साहस कर रही है।
नेताओं ने कहा कि जो लोग सत्ता की चापलूसी कर अपने स्वार्थ साध रहे हैं, वही आज लोकतंत्र और पारदर्शिता की बातें कर रहे हैं। संविधान का अपमान करने, बंगाल के महापुरुषों को नीचा दिखाने और जनता की पीड़ा को नजरअंदाज करने का आरोप भी भाजपा पर लगाया गया। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को कथित तौर पर परेशान किए जाने और भय की राजनीति फैलाने के प्रयासों की कड़ी निंदा की गई।
वक्ताओं का कहना था कि भाजपा बंगाल की आत्मा को नहीं समझती। वह केवल विभाजन की राजनीति के सहारे सत्ता हासिल करना चाहती है, जबकि बंगाल की परंपरा मानवता, सहअस्तित्व और लोकतांत्रिक मूल्यों की रही है। “मां-माटी-मानुष” के नारे के साथ जनता के समर्थन का हवाला देते हुए कहा गया कि यही जनशक्ति इस लड़ाई की सबसे बड़ी ताकत है।
सभा में यह भी कहा गया कि ईडी और अन्य एजेंसियों के माध्यम से आवाज दबाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन जनता लोकतांत्रिक तरीके से भाजपा के “बंगाल विजय” के सपनों को चकनाचूर करेगी। डर और दमन की राजनीति के जवाब में मानवता और जनसेवा की राजनीति को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।
महाविरोध मार्च के अंत में कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आह्वान किया गया कि वे संघर्ष के लिए तैयार रहें, एकजुट रहें और लोकतंत्र की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करते रहें। पूरे मार्च के दौरान “जय बांग्ला” के नारों से माहौल गूंजता रहा और यह संदेश स्पष्ट था कि बंगाल की जनता अपनी अस्मिता, अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों से कोई समझौता नहीं




























