Kaushlendra Pandey / पटना: बिहार में संभावित संकटों से निपटने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (CMG) की पहली उच्चस्तरीय बैठक ने यह साफ कर दिया है कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होगी। करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में राज्य के शीर्ष अधिकारी, सभी जिलों के डीएम-एसपी और तेल कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जहां सरकार ने आम जनता को राहत और जरूरी सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब CMG की बैठक हर सोमवार नियमित रूप से होगी और हर विभाग को अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। जिलों की जिम्मेदारी तय करते हुए स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी स्तर पर ढिलाई पाए जाने पर जवाबदेही तय की जाएगी। विशेष रूप से ईंधन आपूर्ति को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है, क्योंकि कई जिलों में LPG आपूर्ति में भारी बैकलॉग सामने आया है। डीएम और एसपी को तत्काल स्थिति सुधारने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं पेट्रोल पंपों पर औचक निरीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि “दीदी की रसोई” और छात्रावासों में गैस आपूर्ति किसी भी हाल में बाधित न हो।
PNG कनेक्शन को लेकर भी बैठक में नाराजगी सामने आई। राज्य में 3.68 लाख घरों तक कनेक्शन देने का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन कई जिलों में प्रगति बेहद धीमी है और 14 जिलों में काम पूरी तरह ठप है। इस पर मुख्य सचिव ने संबंधित एजेंसियों को फटकार लगाते हुए तुरंत कार्ययोजना तैयार करने और संसाधन बढ़ाने का निर्देश दिया। साथ ही सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए साफ कहा है कि ऐसे मामलों में सीधे FIR दर्ज की जाएगी और सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी रखी जाएगी।
प्रवासी श्रमिकों को लेकर भी सरकार ने अहम कदम उठाए हैं। जल्द ही टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाएगा और लौट रहे श्रमिकों का पूरा डेटा तैयार किया जाएगा, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिल सके। जनता से संवाद बनाए रखने के लिए हर जिले में रोज दोपहर 3 बजे प्रेस ब्रीफिंग अनिवार्य की गई है और फेक न्यूज फैलाने वालों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कंट्रोल रूम की निगरानी खुद जिलाधिकारी करेंगे।
इसके अलावा, प्रभारी सचिव और आयुक्तों को निर्देश दिया गया है कि वे खुद जिलों में जाकर एलपीजी स्टॉक, कंट्रोल रूम और श्रमिकों की स्थिति का निरीक्षण करें और दो दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कुल मिलाकर, यह बैठक केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक ठोस एक्शन प्लान के रूप में सामने आई है। सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए पूरी तैयारी है, अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन निर्देशों का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है।




























