Kaushlendra Pandey / बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल का जल’ योजना के प्रभावी एवं सतत क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के विशेष सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में औरंगाबाद एवं अरवल जिलों के कार्यपालक अभियंता सहित संबंधित पदाधिकारी शामिल हुए, जहां पेयजल आपूर्ति को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा लंबित शिकायतों के शीघ्र निवारण को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान विशेष सचिव ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि आम नागरिकों को शुद्ध एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी। समीक्षा में यह निर्णय लिया गया कि CGRC पोर्टल पर लंबित शिकायतों का निवारण कर यथाशीघ्र जलापूर्ति योजनाओं को चालू किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार नलकूप निर्माण कराकर प्रभावित क्षेत्रों में जलापूर्ति बहाल की जाएगी, ताकि सभी घरों तक नियमित जल उपलब्ध हो सके। जिन क्षेत्रों में तकनीकी कारणों से जलापूर्ति बाधित थी, वहां आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए जलापूर्ति को सुचारू करने के निर्देश दिए गए।
इसी क्रम में अरवल प्रमंडल के विभिन्न पंचायतों में शेष बचे कनेक्शनों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण करने पर विशेष बल दिया गया, ताकि प्रत्येक घर तक नल का जल पहुंचाने के लक्ष्य को शीघ्र हासिल किया जा सके। साथ ही CGRC पर लंबित शिकायतों का समाधान में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए, जिससे जल आपूर्ति व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके।
बैठक में विभाग द्वारा कर्मियों के हितों का भी ध्यान रखते हुए ऑपरेटरों के लंबित मानदेय के त्वरित भुगतान की दिशा में जिलाधिकारी के समीक्षा बैठक के साथ यथाशीघ्र समन्वय करने का निर्देश दिया गया, जिससे कार्यरत कर्मियों का मनोबल बना रहे और वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी दक्षता से कर सकें। इसके अतिरिक्त, जल संकट के स्थायी समाधान हेतु संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर समेकित रूप से कार्य करने का निर्देश दिया गया, ताकि तकनीकी एवं प्रशासनिक बाधाओं को दूर करते हुए आमजन को निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
विशेष सचिव ने सभी अभियंताओं को निर्देशित किया कि वे क्षेत्र में नियमित निरीक्षण करें तथा प्राप्त शिकायतों का त्वरित और प्रभावी निवारण सुनिश्चित करें। बैठक के अंत में विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं जन-हितैषी बनाने का निर्देश दिया गया।
























