पटना, 7 जुलाई। मिशन निपुण के पाँच वर्ष पूरे होने के अवसर पर बिहार के सभी सरकारी विद्यालयों में 1 से 7 जुलाई 2026 तक ‘पठन पर्व’ का सफल आयोजन किया गया। इस दौरान प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों ने हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बांग्ला और मैथिली भाषाओं में कहानियों एवं कविताओं का जोरदार और धाराप्रवाह पठन कर अपनी भाषाई दक्षता का प्रदर्शन किया।
शिक्षा विभाग के अनुसार पठन पर्व का उद्देश्य बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना, धाराप्रवाह पठन की क्षमता बढ़ाना तथा भाषा सीखने के प्रति रुचि और आत्मविश्वास पैदा करना था। पूरे सप्ताह विद्यालयों में बच्चों के बीच उत्साह, जिज्ञासा और सीखने का सकारात्मक माहौल देखने को मिला।
विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ), जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (डीपीओ) तथा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को इस कार्यक्रम के सफल संचालन के निर्देश दिए थे। निर्देशानुसार प्रत्येक विद्यालय में पहली घंटी के दौरान प्रतिदिन 15 मिनट पठन गतिविधि आयोजित की गई।
शिक्षकों को बच्चों की आयु और कक्षा के अनुरूप अध्ययन सामग्री का चयन करने के लिए कहा गया था। पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ विद्यालय पुस्तकालय की पुस्तकों का भी उपयोग किया गया। छोटे बच्चों के बेहतर पठन के लिए उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों का सहयोग भी लिया गया।
शिक्षा विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया कि जो बच्चे किसी कारणवश विद्यालय नहीं आ सके, उनके लिए मोबाइल के माध्यम से घर पर भी पठन गतिविधि कराई जाए।
विभाग का मानना है कि इस अभियान से विद्यालयों को आत्ममंथन का अवसर मिला कि मिशन निपुण के उद्देश्यों के अनुरूप कितने बच्चे धाराप्रवाह पठन की क्षमता विकसित कर चुके हैं। पठन पर्व के माध्यम से बच्चों में भाषा कौशल, आत्मविश्वास और सीखने की गुणवत्ता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।




























